देहरादून : 33वें राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह के समापन के अवसर पर संजय ऑर्थोपीडिक, स्पाइन एवं मैटरनिटी सेन्टर, जाखन, देहरादून एवं सेवा सोसाइटी के वरिष्ठ ऑर्थोपीडिक एवं स्पाइन सर्जन पद्म श्री डाॅ. बी. के. एस. संजय एवं ऑर्थोपीडिक एवं स्पाइन सर्जन डाॅ. गौरव संजय ने पूर्व वर्षो की भांति इस वर्ष भी राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा अभियान के अंर्तगत कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिसका वर्णन इस प्रकार है, आकाशवाणी दूरदर्शन में साक्षात्कार एवं राजकीय दून मेडिकल काॅलेज देहरादून, हिमालयीय आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय, देहरादून तथा आई.आई.टी., रुड़की में सड़क सुरक्षा के ऊपर व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस सप्ताह इनकी संस्थान द्वारा आकाशवाणी एवं दूरदर्शन के माध्यम से भी सड़क सुरक्षा के बारे में कई कार्यक्रम किये गये। अब तक इनके संस्थान द्वारा 200 से भी अधिक निःशुल्क जन जागरूकता व्याख्यान दिये जा चुके हैं। जिसका उल्लेख इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स में किया जा चुका है।
पद्मश्री डाॅ. बी. के. एस. संजय ने इन सभी संस्थानों के छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए बताया कि उन्होंने अपने एक शोध में पाया है कि 90 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाऐं वाहन चालक की लापरवाही के कारण होती हैं और लापरवाही एक व्यवहारिक समस्या है जिसके ऊपर सभी नीति-निर्माताओं एवं समाज के प्रबुद्ध जनों का ध्यान आकर्षित कराना चाहता हूँ कि यदि वाहन चालक के व्यवहार में किसी भी ढंग से बदलाव लाया जाना चाहिए चाहे फिर वह चालक की काउंसलिंग के द्वारा या फिर दंडात्मक कार्यवाही के द्वारा। क्योंकि सड़क दुर्घटनाओं के मुख्य कारण हैं ओवरस्पीडिंग, ओवरटेकिंग, नशे के प्रभाव में वाहन चलाना या फिर शारीरिक एवं मानसिक थकान के बावजूद भी वाहन चलाना। रात की घटनाऐं जानलेवा होती हैं इसी को ध्यान में रखते हुए अनावश्यक यात्राऐं रात में कम से कम करनी चाहिए। गति को नियंत्रित करने के लिए वाहनों में स्पीड गवर्नर की व्यवस्था से सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।
कार्यक्रम के दौरान डाॅ. गौरव संजय ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए बताया कि आप सभी देश के भविष्य हैं और लगभग 70 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाऐं 15-44 साल की उम्र में होती हैं जिस आयु वर्ग के अंर्तगत आप सभी छात्र-छात्राऐं आते हैं। व्याख्यान के दौरान डाॅ. गौरव संजय ने कहा कि यहां पर बैठे हुए आप सभी प्रबुद्ध जनों एवं छात्र-छात्राओं से अपील है कि यातायात के नियमों को सीखें एवं ईमानदारी से उनका पालन करें। वाहन चलाते समय दुपहिया वाहन चालकों को हेलमेट का उपयोग करना चाहिए एवं हेलमेट अच्छी क्वालिटी के होने चाहिए। इसके साथ ही चौपहिया वाहन चालको को सीट बेल्ट का उपयोग करना चाहिए। सीट बेल्ट न केवल वाहन चालकों को अपितु वाहन में सवार सभी लोगों को पहननी चाहिए। डाॅ. गौरव ने सुझाव दिया कि जिस तरह से वायुयानों की हर सीट पर प्रत्येक यात्री के लिए सुरक्षा पेटी की व्यवस्था होती है और उसको बांधना सभी यात्रियों को अनिवार्य होता है। उसी तरह से उनका मानना है कि बसों में होने वाले दुर्घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए सार्वजनिक बसों में और खासतौर से स्कूली बसों में भी सीट बेल्ट की व्यवस्था होनी चाहिए।
डाॅ. संजय ने विभिन्न विश्वविद्याालयों में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत जन जागरूकता व्याख्यान का अवसर प्रदान करने के लिए राजकीय दून मेडिकल काॅलेज के प्रधानाचार्य डाॅ. आशुतोष सयाना, हिमालयीय आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय, देहरादून के कुलपति प्रो. जे. पी. पचैरी तथा आई.आई.टी., रुड़की के निदेशक प्रो. के. के. पंत, प्रो. प्रवीन कुमार एवं प्रो. सतेन्द्र मित्तल का आभार प्रकट किया।
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