मसूरी – भगवान शंकर आश्रम में खिला ब्रहम कमल।

मसूरी : पर्यटन नगरी मसूरी जहां अपने प्राकृतिक सौंदर्य से पूरे विश्व को आकर्षित करती है वहीं इन दिनों आध्यात्मिक स्थल भगवान शंकर आश्रम चर्चाओं में है जहां मसूरी के 200 वर्षों के इतिहास में पहली बार दुर्लभ पुष्प ब्रह्मकमल लगातार खिल रहे हैं। इन चमत्कारिक पुष्पों को देखने के लिए श्रद्धालु जीवन पर्यन्त प्रतीक्षा करते हैं, और भी आश्चर्य की बात यह है कि ये पुष्प ज़्यादातर विशेष शुभ तिथियों में पल्लवित हो रहे हैं।


आर्यम इंटरनेशनल फ़ाउंडेशन के तत्त्वावधान में संचालित भगवान शंकर आश्रम अपनी बहुत सी आध्यात्मिक और धार्मिक गतिविधियों के लिए जाना जा रहा है। इसके संस्थापक प्रमुख गुरुदेव प्रोफ़ेसर पुष्पेंद्र कुमार आर्यम ने इस बारे में बताया कि आश्रम के उद्घाटन अवसर पर वर्ष 2016 में यहाँ आनंद वाटिका के नाम से एक प्रकल्प प्रारम्भ किया था। इस वाटिका में धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिष के दृष्टिकोण से सैंकड़ों पौधे लगाए गए थे उनमें ही दो प्लांट ब्रह्मकमल के भी रौंपे गए थे। चार वर्ष पश्चात इस वर्ष ब्रह्मक़मल बुद्ध पूर्णिमा 26 मई को सबसे पहले एक साथ छह पुष्प खिले। उसके बाद अब तक पूर्णिमा, अमावस्या, एकादशी और शिवरात्रि पर असंख्य पुष्प अनवरत खिल रहे हैं। देवी देवताओं के लिए पूजा प्रार्थना में बहुत से पुष्पों का अपना महत्व रहता है परंतु यह अकेला पुष्प है जिसकी पूजा की जाती है। आचार्य आर्यम के अनुसार देवताओं का प्रिय यह पुष्प स्वयं में अनूठा और दुर्लभ है। भाग्यशाली मनुष्य ही इस पुष्प को खिलते देखने का सौभाग्य प्राप्त कर पाते हैं। यह उत्तराखंड का राजकीय पुष्प है और हिमालयी पुष्पों का सम्राट। उत्तराखंड में इसे कौलपद्म’ के नाम से भी जाना जाता है। उत्तराखंड में ब्रह्मकमल की 24 प्रजातियाँ मिलती हैं। जबकि पूरी दुनिया में इससे मिलती जुलती 210 प्रजातियाँ प्राप्त होती हैं। सामान्यतः मैदानी क्षेत्रों में खिलने वाले अनेक पुष्पों को जो इससे काफ़ी मेल खाते हैं, भ्रमवश वास्तविक ब्रह्मकमल मान लिया जाता है। उनके आकर और सुगंध के आधार पर इस पुष्प की पहचान की जाती है। केदारघाटी से ऊपर पिंडारी ग्लेशियर के समीप फूलों की घाटी और कैलास मानसरोवर मार्ग में स्थित ब्रह्म क्षेत्र में ही इसके खिलने के उल्लेख प्राप्त होते हैं। मसूरी की ऊँचाई 6578 फुट है। लगभग आधी ऊँचाई पर मसूरी में ब्रह्म कमल खिलने से भगवान शंकर आश्रय आजकल चर्चा का विषय बना हुआ है। इस पुष्प के खिलने का समय जुलाई से सितम्बर तक होता है लेकिन मई माह से पुष्पों का लगातार खिलना स्वयं में किसी चमत्कार से कम नहीं। गुरुदेव आर्यम जी महाराज ने बताया कि वेदों, पुराणों, उपनिषदों और हमारे प्राच्य धार्मिक ग्रंथों में इस पुष्प के उल्लेख मिलते हैं।
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