रूद्रेश्वर महाराज के खुले कपाट, कल होगा देवराना मेला।

रिपोर्ट – अरविन्द थपलियाल

उत्तरकाशी/नौगांव : रवांई घाटी के 65 गांव के आराध्य देव रुद्रेश्वर महादेव के कपाट आज विधिवत पूजा/अर्चना के बाद भक्तों के लिए खोल दिए गए हैं। भगवान रुद्रेश्वर महादेव का आशीर्वाद लेने के लिए हजारों लोग दूर दराज से कंडाऊं थान पहुंचे। स्थानीय लोगों ने इस दौरान ढोल–दमाऊं की थाप पर तांदी नृत्य कर अपनी खुशी का इजहार किया। रवांई घाटी के 65 गांव के आराध्य देव रुद्रेश्वर महादेव सालभर में केवल एक माह अपने गर्भ गृह से बाहर आकर अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। सोमवार को दोपहर शुभ मुहूर्त 3 बजकर 28 मिनट पर रुद्रेश्वर महादेव गर्भ गृह से बाहर निकाले। इस मौके पर दूर–दराज से आए ग्रामीणों/भक्तों ने श्रीफल, चुनरी, चावल, हरियाली का रुद्रेश्वर महादेव को भेंट स्वरूप भोग लगाकर दर्शन करने के बाद आशीर्वाद लिया। साथ ही क्षेत्र की सुख–समृद्धि की कामना की है। इस दौरान लोगों ने ढोल/दमाऊं की थाप पर रासौं/तान्दी नृत्य कर अपनी खुशी का इजहार किया है। 4 जुलाई को यहां रवांई घाटी का सुप्रसिद्ध मेला (डांडा देवराना की जातर) का हर वर्ष की तरह आयोजन किया जाएगा।,महाराज रूद्रेश्वर तकरीवन 65गांव के आरध्यदेव हैं और चार मुल थानों तियां,बजलाडी़,कंडाऊ,देवलसारी,में बारी बारी से रहते हैं और इस बार रूद्रेश्वर महाराज कंडाऊं थान में विराजमान थे ,मंगलवार को रूद्रेश्वर महाराज पौराणिक देवराना मेले में पंहुचेगें जहां हजारों लोग दर्शन करेंगे।
धार्मिक मान्यता और पंरपराओं के अनुसार रूद्रेश्वर महाराज भ्रमण करेगें और देवराना मेले से गांव गांव का भ्रमण करेंगे।
देवराना मेला सुदंर देवदार के संघन जंगल में होता है और सुदंर मंदिर बना हुआ है इसके अलावा मेले में दूरदराज से हजारों की तादात में श्रद्वालु पंहुचते हैं।
देवराना मेले में रवांई की संस्कृति की अनोखी झलक देखने को मिलती है,देवराना मेला हजारों लोगों के आस्था का प्रतिक है और मेले को राजकीय मेला घोषित होने की मांग लगातार हो रही।
देवराना घाटी को पर्यटन की दृष्टी से भी महत्वपूर्ण और यदि देवराना मेला राजकीय मेला घोषित होता है तो क्षेत्र के विकास की भी संभावनायें भी बढ जाती हैं।

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