मसूरी : पंजाब के सिख साम्राज्य के अंतिम शासक महाराजा दिलीप सिंह का मसूरी से गहरा लगाव रहा है। महाराजा दिलीप सिंह अपने जीवन काल में तीन वर्ष के करीब मसूरी में रहे थे ,महाराजा रणजीत सिंह के सबसे छोटे पुत्र और सिख साम्राज्य के अंतिम शासक रहे। महाराजा दिलीप सिंह का मसूरी से गहरा संबध रहा था ,उन्होने मसूरी में अपनी प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की थी,उनको तत्कालिन अंग्रेज हुकुमत मसूरी लेकर आई थी।
इतिहासकार गोपाल भारद्वाज ने बताया कि पंजाब के अंतिम शासन में रहे महाराजा दिलीप सिंह मसूरी के बार्लाेगंज कैसल में रहे थे, उन्होने बताया कि माहाराजा दिलीप सिंह ने मसूरी में शिक्षा ग्रहण की घुङसवारी के साथ संगीत भी सीखा ,साथ ही किक्रेट भी खेला था, बताया कि छोटी उम्र में माहाराजा को अंग्रेज मसूरी ले आए थे, मसूरी में आने के बाद महाराजा दिलीप सिंह गांधी चैक पर बैंड स्टैंड पर रोज बैंड सुनने को जाया करते थे।
इतिहासकार गोपाल भारद्वाज ने बताया कि 1848 में जब अंग्रेजो सिखों के बीच दूसरा युद्व हुआ था उसके बाद अंग्रेजो ने पंजाब पर कब्जा कर लिया और सिख साम्राज्य को अंग्रेज शासन में मिला दिया और महाराजा दिलीप सिंह को करीब 13 वर्ष की अल्पायु में लाहौर से मसूरी ले आए थे, अंग्रेजो को डर था कि महाराजा लाहौर में रहेगें तो सिख सेना विद्रोह कर सकती इसलिए उनको मसूरी लेकर आ गई, गोपाल भारद्वाज ने बताया कि अनुचित तरीके से अंग्रेजो ने पंजाब को अपने शासन में मिला दिया था। उन्होंने कहा कि पहले महाराजा दिलीप सिंह को फतेहगढ कानपुर ले गए ,लेकिन उसके बाद अंग्रेजो ने माहाराजा दिलीप सिंह 1851 से 1853 तक गर्मियों में मसूरी रखते थे। उसके बाद उनको फतेहगढ में भेजा गया उसके बाद 1854 में उनको इंग्लैड भेज दिया, अंग्रेजो ने उनसे मशहूर कोहिनूर हीरा छीन लिया व साथ अन्य दुलर्भ वस्तुएं भी अपने कब्जे में ले ली थी। उन्होने बताया कि महाराजा दिलीप सिंह को जब मसूरी लेकर आए थे तब वह बहुत छोटे थे, बताया कि सिख साम्राज्य बहुत विशाल था ,लेकिन अंग्रेज वहां से बहुत कुछ बेशकिमती सामान अपने साथ इंग्लैंड लेकर चले गए थे .बताया कि महाराजा दिलीप सिंह छोटी उम्र में बहुत विद्वान थे ,महाराजा दिलीप सिंह जब मसूरी रहते थे तब मालरोङ में बहुत सारे विषयों पर लोगों को लेक्चर दिया करते थे, बताया कि महाराजा मालरोङ में घोङे में घुमा करते थे, उन्होंने बताया कि तेरह साल की उम्र में महाराजा को मसूरी लेकर आए थे उसके बाद महाराजा दिलीप सिंह दिल्ली ,मेरठ और हरिद्वार भी गए थे, कहा कि अपनी उम्र के हिसाब से महाराजा दिलीप सिंह अधिक बुद्विमान थे। उन्हें भारतीय संस्कृति का भी अच्छा ज्ञान था व उसमें गहरी रूचि भी थी। अंग्रेजों ने उनकी प्राथमिक शिक्षा मसूरी में ही दी वहीं उन्हें एक अंग्रेज परिवार के साथ रखा गया व उन्हें ईसाई बनाया गया व उनके तरीके सिखाये व उसके बाद उन्हें इंग्लैंड ले गये।
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