गंगा नदी की निर्मलता अविरलता हेतु जन भागीदारी जरूरी।

रिपोर्ट – जितेन्द्र गौड़

टिहरी गढ़वाल : गंगा जल में विद्यमान अनगिनत दिव्य गुणों के कारण ही न केवल धरती पर जीवन है बल्कि गंगा जल के दिव्य गुणों के कारण धरती पर जीवन का उद्भव हुआ और गंगा, नर्मदा जैसी पवित्र नदियों का विकास हुआ है। विडंबना है कि पवित्र गंगा जल की निर्मात्री गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों का अस्तित्व खतरे में है, आज नदियों का प्रदूषण रोकना बड़ी चुनौती बन चुका है। गंगा नदी में बढ़ते प्रदूषण के कारण गंगा जल की पवित्रता, अविरलता, निर्मलता और गंगा नदी का अस्तित्व खतरे में है। गंगा घाटों और गंगा तटों पर धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप आयोजित होने वाले गंगा स्नान मेला आदि पर्वों पर मां गंगा में विविध प्रकार का कूड़ा- कचरा, जहरीली दवाइयां, फैक्ट्री का प्रदूषित जल, गंदगी, पॉलिथीन डालकर गंगा को निरंतर प्रदूषित किया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं में गंगा जल की महत्ता को हमारे पूर्वज भी अच्छी तरह मानते थे। मानव जीवन के लिए गंगा और गंगा जल की आवश्यकता और उपयोगिता का हमारी तमाम प्राचीन पुस्तकों एवं धार्मिक कृतियों में विस्तृत उल्लेख है। धरती पर पाये जाने वाले पदार्थों में सबसे असाधारण, दिव्य और अनगिनत विशिष्ट गुण गंगा जल में विद्यमान हैं। इन दिव्य और विशिष्ट गुणों के कारण गंगा, नर्मदा जैसी पवित्र नदियां अस्तित्व में आईं। गंगा जल के आश्चर्यजनक और दिव्य गुणों के कारण गंगा जल मानव कल्याण का आधार है। गंगा जल और गंगा नदी प्रकृति की सबसे अनमोल भेंट हैं। गंगा जल हमारे जीवन के लिए अत्यंत कल्याणकारी और उपयोगी भी है। हमें चाहिए कि हम गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों को संरक्षित व सुरक्षित रखें और उन्हें प्रदूषित होने से भी बचाएं। वास्तव में मोक्षदायिनी गंगा के जल के बिना श्रेष्ठ जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। गंगा जल की निर्मलता, पवित्रता को बनाए रखने हेतु गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों को प्रदूषण मुक्त रखने के प्रयासों को हमें तीव्र गति देनी होगी। मां गंगा की अविरलता, निर्मलता तथा उसके अस्तित्व को बचाने के लिए आज विशेष मुहिम चलाने की आवश्यकता है। मां गंगा की अविरलता और निर्मलता पर प्रश्नचिन्ह लगना बेहद चिंतनीय और निंदनीय भी है। ये सर्वदा सत्य है कि गंगा नदी और उसकी सहायक नदियां गंगा जल और पर्यावरण को संरक्षित करने में महती भूमिका निभाती हैं। मां गंगा की अविरलता, निर्मलता और स्वच्छता हेतु जन भागीदारी की नितांत आवश्यकता है। जन जागरूकता के बिना गंगा के अस्तित्व को खतरा बढ़ेगा और गंगा जल के प्रदूषित होने होने का खतरा बढ़ेगा। समाज को गंगा जल के संवर्धन व संरक्षण के लिये प्रयास करने होंगे। हमें चाहिए कि हम समय रहते अपनी जिम्मेदारियों को समझें और बखूबी गंगा के संरक्षण संवर्धन की चिंता करें, ताकि अगली पीढ़ी को गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों के विलुप्त होने के खतरे का सामना न करना पड़े। सर्व विदित है कि मां गंगा ने बहुतायत लोगों के जीवन को परिवर्तित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और लोगों को अपने जीवन का पुनर्मूल्यांकन करने और श्रेष्ठतर प्रकार से जीवन जीने में सहायता की है। परन्तु आज इस पवित्र नदी मां गंगा और उसकी सहायक नदियों पर अब प्रदूषण का खतरा मंडरा रहा है। यमुना और हिंडन नदी की हालात बद से बदतर हैं और इनकी दुर्दशा देख हृदय में भारी पीड़ा होने लगती है। पवित्र नदी मां गंगा के प्रदूषण को समाप्त करने के लिए विभिन्न प्रयासों के बावजूद इस संबंध में अभी बहुत कुछ किया जाना शेष है। भारत सरकार की ओर से पवित्र नदी मां गंगा और उसकी सहायक नदियों की रक्षा करने के लिए विभिन्न योजनाओं में से नमामि गंगा परियोजना भागीरथ प्रयास है। हिमालय के हिमशिखरों से निकलने वाली गंगा नदी की मूल यात्रा अत्यंत कठिन डगर पर है।
लेखक:- डॉ रविन्द्र कुमार राणा प्रख्यात
पर्यावरणविद एवं साहित्यकार हैं।

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