मसूरी : शहीद भगत सिंह के 114वें जन्म दिवस पर इप्टा मसूरी ने शहीद ए आजम भगत सिंह सम्मान समारोह का आयोजन किया जिसमें आजादी में अहम योगदान देने वाले अश्फाक उल्ला खां, भगत सिंह, सुखदेव, बहादुर शाह जफर के परिजनों को सम्मानित किया गया। वहीं स्थानीय स्तर पर भी तीन विभूतियों को सम्मानित किया गया।
वहीं पत्रकारों से बातचीत में पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद ने कहा कि किसान आंदोलन का समर्थन करते रहेंगे नेता राज्यसभा के रूप में भी अपने संबोधन में यह मामला उठाया। सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने कहा कि अंग्रेजों के राज में छह ऐसे आंदोलन हुए थे जो कि साल साल भर चले लेकिन आखिर अंग्रेजी सरकार को झुकना पड़ा व कानून वापस लेना पड़ा। राजीव गांधी के समय भी 88 में राकेश टिकैत के पिता के समय आंदोलन हुआ था वहीं हमने भी समानांतर आंदोलन वोट क्लब में करना था लेकिन वहां पर दो दिन पहले ही टिकैत पचास हजार किसानों को हुक्का, चारपाई लेकर आ गये तब यह रैली लाल किले में की हमने उन्हें हटाया नहीं जबकि दस लाख लोग रैली में शामिल थे किया उसका में जनरल सेक्रेट्री था। ऐसे में सरकार को इस आंदोलन को वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसदीय राजनीति अलग होती है व व्यक्तिगत राजनीति अलग होती है। संसद में हम एक दूसरे के कार्यों की आलोचना करते है सरकार ने किसान बिल गलत लाया उसके खिलाफ है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसी मंत्री को गाली दें। लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए कि सभी संसद के सदस्य है जनता ने चुनकर भेजा है। देश की आजादी में भी मतभेद थे गांधी का अलग रास्ता था, अस्फाक उल्ला, सुभाष चंद्र बोस का अलग रास्ता था लेकिन सभी का मकसद एक था। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में सबसे पहले स्टेट बहाल किया जाय व चुनाव कराया जाय। क्योंकि देश की सबसे पुरानी स्टेट है 1846 की है जो 176 साल पुरानी है।
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