टिहरी गढ़वाल : ऊंची कंद्राओं की गोद में बसी देवल सारी स्थित भोले नाथ के प्राचीन मंदिर में पड़ी हरियाली के आखरी दिन पांडव नृत्य रांसो तांदी की धूम रही मंदिर के मुख्य पुजारी ने दोपहर के समय हरियाली काटकर श्रद्धालुओं को वितरित किया वहीं श्रद्धालुओं के दर्शनाथ हेतु देव डोली भी बाहर निकाली गई।
देवल सारी स्थित भगवान शंकर के प्राचीन मंदिर में पड़ी हरियाली के आखरी दिन कालरात्रि के मौके पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। पांडव नृत्य के साथ ही पारम्परिक लोक संस्कृति व रांसो तादी की धमक पर लोगों ने जमकर ठुमके लगाए, रविवार दोपहर के समय मंदिर के पुजारी विजय गौड़ ने हरियाली के आयोजक पुजाल्डी निवासियों और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में हरियाली काटकर प्रसाद स्वरूप वितरित कर विश्व शांति की प्रार्थना की है, तदोपरांत भगवान भोले नाथ की पालकी मंत्रोच्चारण के साथ बाहर निकाली गई है, ग्रामीणों के मुताबिक भगवान कोनेश्वर महादेव की पालकी साल में दो बार बैसाख, व भादों के महीने बाहर निकाली जाती है, जो क्रमवार पुजा लडी बंगसील, तेवा और ठिक गाव में जाती है, उसके पश्चात पालकी को देवल सारी स्थित प्राचीन मंदिर के गर्भ गृह में विस्थापित की जाती है।
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