नए वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के पारित होने के बाद कई राजनीतिक दलों, एनजीओ और लोगों ने इसे चुनौती दी। सर्वोच्च न्यायालय की ओर से इसके कुछ महत्वपूर्ण प्रावधानों पर रोक लगाने के साथ इस कानूनी लड़ाई ने एक दिलचस्प मोड़ ले लिया है। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कि कानून के लागू होने से लेकर सर्वोच्च न्यायालय के अंतरिम फैसले तक के घटनाक्रमों पूरी टाइमलाइन…
लोकसभा ने वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पारित किया।
राज्यसभा ने विधेयक पारित किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विधेयक को मंजूरी दी।
आप नेता अमानतुल्लाह खान ने विधेयक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। कई अन्य लोगों ने भी शीर्ष अदालत का रुख किया। असदुद्दीन ओवैसी, मोहम्मद जावेद, AIMPLB और अन्य ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं पर सुनवाई की और याचिकाओं को ‘वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के संबंध में’ नाम दिया। सरकार की ओर से ‘उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ’ या ‘दस्तावेज द्वारा वक्फ’ संपत्तियों को इस बीच गैर-अधिसूचित नहीं किए जाने का आश्वासन दिए जाने के बाद पीठ ने केंद्र को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया।
केंद्र ने याचिकाओं को खारिज करने की मांग की और कहा कि कानून पर पूर्ण रोक नहीं लगाई जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट ने कानून के खिलाफ नई याचिकाओं पर विचार करने से इनकार कर दिया।
तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने कहा कि इस मामले पर उनके उत्तराधिकारी न्यायमूर्ति बी. आर. गवई 15 मई को विचार करेंगे।
मुख्य न्यायाधीश गवई ने अंतरिम राहत के मुद्दे पर 20 मई को सुनवाई की तारीख तय की।
सर्वोच्च न्यायालय ने याचिकाओं पर सुनवाई की और फैसला सुरक्षित रखा।
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