केदारनाथ (रुद्रप्रयाग) – हिमालय की गोद में बसे बाबा केदारनाथ धाम में कपाट बंद होने की प्रक्रिया विधिवत रूप से आरंभ हो चुकी है। अब शीतकालीन प्रवास से पहले भोलेनाथ की पूजा में बदलाव किया गया है। आज से बाबा की आरती बिना शृंगार के की जाएगी, यानी उन्हें निरंकार रूप में पूजा जाएगा।
इस अवसर पर मंदिर को दिव्य पुष्पों और रोशनी से भव्य रूप से सजाया गया है, लेकिन शिवलिंग पर अब फूल-मालाएं या वस्त्र नहीं चढ़ाए जाएंगे। यह परंपरा कपाट बंद होने से कुछ दिन पहले निभाई जाती है, जब बाबा के श्रृंगार को धीरे-धीरे हटाकर उन्हें प्रकृति के मूल रूप में पूजा जाता है।
21 अक्टूबर को बाबा केदारनाथ के कपाट शीतकाल के लिए विधिवत रूप से बंद कर दिए जाएंगे, जिसके बाद भगवान की उत्सव मूर्ति को ओंकारेश्वर मंदिर (उखीमठ) ले जाया जाएगा, जहां पूरे शीतकालीन काल में पूजा-अर्चना होती है।
इन अंतिम दिनों में देशभर से श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शनों को पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं, और प्रशासन द्वारा सुरक्षा व प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए गए हैं।
मंदिर समिति और पुरोहितों ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि मौसम को देखते हुए यात्रा से पहले मौसम की जानकारी लें और आवश्यक वस्तुएं साथ रखें, क्योंकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना जताई गई है
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