पद्म भूषण लेखक रस्किन बाॅड ने कोरोना संक्रमण के चलते सादगी से मनाया 87वां जन्म दिन।

मसूरी : कोरोना संक्रमण के चलते रस्किन बाॅड ने अपना 87वां जन्म दिन घर पर ही सादगी से अपने परिजनों के साथ मनाया। इस मौके पर वह किसी भी प्रशंसक से नही मिले। पद्म भूषण रस्किन बाॅड का जन्म 19 मई 1934 में हिमाचल प्रदेश के कसौली में हुआ था. और उनका बचपन शिमला में बीता। पद्म भूषण बाॅड 1964 में पहली बार मसूरी आये और यहीं के हो कर रहे गए। इस बीच उन्होंने कई रचनात्मक पुस्तकें लिखी जिसके लिए उन्हें विभिन्न प्रमुख प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा गया।
पदम भूषण रस्किन बाॅड ने अभी तक 150 से अधिक पुस्तकें लिख दी है और पूरे विश्व में उनके बड़ी संख्या में प्रशंसक है जिसमें देश विदेश की कई बड़ी हस्तियां भी हैं। उनकी प्रमुख पुस्तकों में द ब्लू अंम्बरेला, द नाइट टेªन एट देहली, देहली इज नाॅट फाॅर रस्किन, अवर ट्री ग्रो इन देहरा, टाइम स्टाॅप एट शामली, ए फेस इन द डार्क एंड अदर हंटिंग, कमिंग अराउंड द माउंटेन, ए सीजन आॅफ घोष्ट आदि हैं। पद्म भूषण रस्किन बाॅड को वर्ष 1957 में जॉन लेवेलिन राइस पुरस्कार, 1992 में साहित्य अकादेमी अवार्ड, 1999 में पद्मश्री और 2014 में पद्म भूषण जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले। पद्मभूषण, पदमश्री लेखक रस्किन बाॅड ने अपना 87वां जन्म दिन घर पर सादगी से मनाया। व केक काटा। उनके जन्म दिवस पर घर में केक काटा गया व इस मौके पर केवल उनके मुंह बोले पुत्र राकेश उनकी पत्नी व तीन बच्चे ही शामिल रहे। इस मौके पर रस्किन बाॅड ने अपने पाठकों को धन्यवाद दिया वहीं देश वासियों को कोरोना संक्रमण महामारी में घर पर ही रहने का संदेश देते हुए कहा कि अपनी सुरक्षा की इसका उपाय है सभी घर पर रहे, मास्क लगाये व हाथ धोते रहें। अगर अगले वर्ष स्थिति सामान्य रही तो अपने प्रशंसकों के बीच जन्म दिन मनायेंगे। कोरोना संक्रमण के चलते उन्होंने इस बार कोई पुस्तक भी लाॅच नही की जबकि वह साल भर में दो से तीन पुस्तके लिखते हैं। मालूम हो कि हर वर्ष वह अपना जन्म दिन अपने प्रशंसकों के साथ मनाते थे वहीं मालरोड स्थित कंेब्रिजबुक डिपो पर जाकर अपने प्रशंसकों के बीच जन्म दिन मनाते थे व अपने प्रशंसकों से मिलने के साथ ही फोटो खिचंवाते थे व इस मौके पर अपनी पुस्तकों पर आटोग्राफ देते थे।

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