यमुनोत्री धाम: हिमस्खलन से मार्ग क्षतिग्रस्त, कई फीट बर्फ जमा, सुरक्षात्मक कार्य के लिए जा रहे मजदूर भी फंसे

यमुनोत्री धाम में हाल ही में हुए हिमस्खलन ने क्षेत्र की स्थिति को गंभीर बना दिया है। भारी बर्फबारी के बाद आए एवलांच के कारण मंदिर परिसर के सामने स्थित घोड़ापड़ाव और आसपास बने टीनशेड पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। कई फीट तक जमी बर्फ ने पूरे इलाके को ढक लिया है, जिससे वहां आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई है। इस प्राकृतिक आपदा के चलते न केवल तीर्थयात्रियों के मार्ग बाधित हुए हैं, बल्कि स्थानीय व्यवस्थाएं भी चरमरा गई हैं।

जानकारी के अनुसार, यमुनोत्री धाम को जोड़ने वाला मुख्य पैदल मार्ग भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। हिमस्खलन की वजह से रास्तों पर भारी मात्रा में बर्फ जमा हो गई है, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। विशेष रूप से भैरो घाटी क्षेत्र में स्थिति और भी अधिक खराब बताई जा रही है। यहां कई स्थानों पर मार्ग पूरी तरह टूट गया है और जगह-जगह बर्फ के बड़े-बड़े ढेर जमा हैं।

इसके अलावा, हिमस्खलन के प्रभाव से कई विशाल पेड़ भी उखड़कर रास्तों में गिर गए हैं, जिससे स्थिति और अधिक जटिल हो गई है। टूटे हुए पेड़ों और बर्फ के कारण रास्तों की पहचान करना भी मुश्किल हो रहा है। इस कारण स्थानीय लोगों और प्रशासनिक टीमों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि सुरक्षात्मक कार्यों के लिए भेजे गए मजदूर भी इस स्थिति में फंस गए हैं। ये मजदूर मार्ग को साफ करने और क्षतिग्रस्त ढांचों को ठीक करने के लिए जा रहे थे, लेकिन भारी बर्फ और अवरुद्ध रास्तों के कारण वे भी आगे नहीं बढ़ सके। इससे राहत और बचाव कार्यों में भी देरी हो रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। जबकि स्थिति को देखते हुए तत्काल राहत और पुनर्निर्माण कार्यों की आवश्यकता है। क्षेत्र में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने और मार्गों को जल्द से जल्द बहाल करने की मांग लगातार उठ रही है।

यमुनोत्री धाम हर साल हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहता है। ऐसे में इस प्रकार की प्राकृतिक आपदा का प्रभाव आगामी यात्रा सीजन पर भी पड़ सकता है। यदि समय रहते मार्गों की मरम्मत और सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार हो रहे मौसम परिवर्तन और भारी बर्फबारी के कारण हिमस्खलन की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे में प्रशासन को पहले से ही सतर्कता बरतनी चाहिए और संवेदनशील क्षेत्रों में आवश्यक सुरक्षा इंतजाम करने चाहिए।

फिलहाल, पूरे क्षेत्र में स्थिति गंभीर बनी हुई है और लोगों को सुरक्षित रहने की सलाह दी जा रही है। प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वह जल्द से जल्द मार्गों को बहाल करे और प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाए।

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