बदलती जीवनशैली और बढ़ते तनाव के बीच लोगों की दवाओं पर निर्भरता तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में विशेषज्ञों ने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह दी है।
आज के दौर में सामान्य बुखार, सिरदर्द और बदन दर्द जैसी छोटी समस्याओं से लेकर गंभीर बीमारियों तक हर स्तर पर दवाओं पर निर्भरता तेजी से बढ़ रही है। स्थिति यह है कि इलाज का पहला और आसान विकल्प दवा बन चुका है। बात अगर कुमाऊं के सबसे बड़े अस्पताल सुशीला तिवारी चिकित्सालय की करें तो यहां हर दिन दो हजार से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार ये मरीज रोजाना 20 हजार से अधिक गोलियों का सेवन कर रहे हैं। संवाद
बदलती जीवनशैली बन रही वजह
विशेषज्ञों के अनुसार आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, खराब खानपान, बढ़ता तनाव और प्रदूषण लोगों के बीमार होने की मुख्य वजह बन रहे हैं। इन कारणों से दवाओं का सेवन बढ़ना स्वाभाविक है लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेना एक गंभीर खतरा बनता जा रहा है।
बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
चिकित्सकों का मानना है कि दवाओं पर निर्भरता कम करने के लिए जीवनशैली में सुधार बेहद जरूरी है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं जिनमें अक्सर जीवनभर दवा लेनी पड़ती है। हालांकि समय रहते सावधानी बरती जाए तो इनसे बचा जा सकता है।
एसटीएच से हर दिन हजारों दवाओं का उपयोग
दवा – प्रतिदिन गोली
दर्द निवारक- 2500
एंटीबायोटिक – 1500
शुगर – 1000
बीपी- 1500
थायरायड- 1500
एंटी एलर्जी- 2500
गैस – 3000
हार्ट – 1200
बुखार – 2500
गर्भवती – 3000 (आयरन-फॉलिक एसिड)
चर्म रोग- (15 दिन के हिसाब से गोली, एंटीबायोटिक, एलर्जी क्रीम)
दर्द निवारक- (150 ट्यूब प्रतिदिन)
आंख- (125 ड्राॅप प्रतिदिन)
ईएनटी- (150 स्प्रे, गोली और ड्राॅप)
सर्जरी- (पथरी, यूरोलॉजी में 40 सिरप, दर्द निवारक, डायलायजर और एंटीबायोटिक)
विशेषज्ञ की सलाह:
दवा से ज्यादा जरूरी बचाव और स्वस्थ जीवनशैली है। समय रहते सही कदम उठाए जाएं तो बीमारियों से बचा जा सकता है। प्रदूषण, मोटापे से दूरी, नमक चीनी का सीमित उपयोग और तले-भुने भोजन से दूरी रखना जरूरी हो गया है। इसके अलावा नियमित व्यायाम, तेज चलना, तंबाकू और शराब से दूरी जरूरी है। बिना जरूरत के विटामिन और सप्लीमेंट लेना भी समस्या है। – डॉ. सौरभ मयंक, एमडी मेडिसिन, उजाला सिग्नेस अस्पताल, हल्द्वानी।
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