पीड़ित किसान ने जमीन दिलाने या फिर उचित मुआवजे की मांग की है, अरविंद पांडे ने बदनाम करने की साजिश बताया.
रुद्रपुर: उधम सिंह नगर के काशीपुर में जमीन विवाद को लेकर एक अनोखा और भावुक करने वाला प्रदर्शन देखने को मिला. पीड़ित किसानों ने 40 दिन की दुधमुंही बच्ची को आगे कर प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई. मामला गदरपुर विधायक अरविंद पांडे और उनके पुत्र पर लगे जमीन धोखाधड़ी के आरोपों से जुड़ा है.
विधायक अरविंद पांडे जमीन विवाद में नया मोड़: उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले में जमीन विवाद का मामला लगातार गहराता जा रहा है. गदरपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक अरविंद पांडे एक बार फिर विवादों में घिरते नजर आ रहे हैं. इस बार आरोप सीधे उनके पुत्र अतुल पांडे पर लगे हैं, जिन पर जमीन के नाम पर धोखाधड़ी करने का गंभीर आरोप है.
अरविंद पांडे के खिलाफ 40 दिन की बच्ची के साथ धरना पर बैठा परिवार: काशीपुर के ग्राम कुंआखेड़ा निवासी किसान मक्खन सिंह का कहना है कि उन्होंने जो जमीन खरीदी थी, उस पर अब विवाद खड़ा हो गया है. उनका आरोप है कि जमीन का सौदा करने में उनके साथ धोखाधड़ी हुई है. न्याय की मांग को लेकर पीड़ित किसानों ने तहसील परिसर में प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन की खास बात यह रही कि इसमें एक 40 दिन की मासूम बच्ची को आगे रखा गया.
बच्ची के साथ प्रदर्शन की हर तरफ चर्चा: इस अनोखे प्रदर्शन ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. किसानों का कहना है कि जब उनकी सुनवाई कहीं नहीं हुई, तब मजबूरी में उन्हें इस तरह का कदम उठाना पड़ा. उनका आरोप है कि सत्ता के प्रभाव के चलते उनकी शिकायतों को नजरअंदाज किया जा रहा है.
किसान ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा: प्रदर्शन के दौरान किसानों ने उपजिलाधिकारी अमृता शर्मा को ज्ञापन सौंपा. इस ज्ञापन में उन्होंने साफ तौर पर मांग रखी कि या तो उनकी जमीन वापस दिलाई जाए, या फिर समान मूल्य की जमीन या बाजार दर के अनुसार पैसा लौटाया जाए.
बुक्सा जनजाति की जमीन से जुड़ा है मामला: इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि भी काफी विवादित रही है. कुछ दिन पहले गूलरभोज नगर पंचायत अध्यक्ष सतीश चुघ ने विधायक पर बुक्सा जनजाति की जमीन हड़पने का आरोप लगाया था. मामला बढ़ता देख विधायक अरविंद पांडे खुद तहसील पहुंचे और अपने पुत्र के नाम दर्ज विवादित जमीन को दोबारा जनजाति के लोगों के नाम करवाया गया था.
15 साल पुराना है जमीन विवाद: हालांकि अब यह मामला और उलझता नजर आ रहा है, क्योंकि पुराने जमीन समझौते और उनकी शर्तों को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं. बताया जा रहा है कि यह विवाद करीब 15 साल पुराना है और समय के साथ इसमें कई बार जमीन की खरीद-फरोख्त भी हुई है.
यहां के विधायक ने गलत तरीके से जमीन को अपने नाम कराया. पहले 8 साल रखने के बाद बेच दिया. पैसे भी ले लिए. फिर अगले 7 साल बाद वो कहते हैं कि गलती से हो गया. अब मैं इस जमीन को बुक्सा समाज को लौटाता हूं. जो मेरा नुकसान है, उसकी भरपाई की जाए.
-मक्खन सिंह, पीड़ित किसान-
विधायक अरविंद पांडे ने रखा अपना पक्ष: विधायक अरविंद पांडे ने इस मामले में अपना पक्ष रखा.
कई साल से एक विवाद चल रहा था. अतुल कुमार के नाम पर बुक्सा जनजाति की जमीन आई. हमें भी इसका पता चल गया था. तुला सिंह ने कमिश्नर के यहां इस विषय को अपील किया. हमें भी इसका नोटिस मिला. जब दो साल कमिश्नर के यहां मुकदमा चला तो हमने अपनी ओर से कोई वकील खड़ा नहीं किया. दो साल मुकदमा चलने के बाद कमिश्नर कोर्ट से बुक्सा जनजाति के पक्ष में एकतरफा आदेश हुआ. कुछ लोगों ने राजनीतिक कारणों से इस आदेश को खतौनी पर नहीं चढ़ने दिया. अब मैंने जमीन उनके नाम से खतौनी में चढ़वा दी है.
-अरविंद पांडे, विधायक, गदरपुर-
अरविंद पांडे ने बदनाम करने की साजिश बताया: विधायक अरविंद पांडे ने ये भी कहा कि चुनाव आने वाला है और मुझे बदनाम करने की नीयत से कुछ लोगों ने इसे खतौनी में नहीं चढ़ने दिया. लेकिन हमने कमिश्नर के आदेश को खतौनी पर चढ़वाने का काम किया है.
एसडीएम ने दिया कार्रवाई का भरोसा: उपजिलाधिकारी अमृता शर्मा ने बताया कि-
बुक्सा समाज की जमीन धारा 200 बी के तहत अतुल पांडे के नाम दर्ज की गई थी, जिसे वर्ष 2020 में बेचा गया. इसके बाद भी उस जमीन की आगे बिक्री होती रही. अब जिनके पास वर्तमान में जमीन है, वे भी विवाद में फंस गए हैं. पीड़ित पक्ष का ज्ञापन स्वीकार कर लिया गया है. पूरे मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है.
-अमृता शर्मा, एसडीएम-
गदरपुर में प्रशासन की अग्नि परीक्षा: फिलहाल यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है. अब देखने वाली बात यह होगी कि जांच के बाद पीड़ित किसानों को न्याय मिल पाता है या नहीं.
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