देहरादून में आज से शुरू हो रहा AIDEF का राष्ट्रीय अधिवेशन, आयुध फैक्ट्रियों के कॉरपोरेटाइजेशन का विरोध

3 लाख रक्षा असैनिक कर्मचारियों के संगठन के तीन दिवसीय अधिवेशन में देश भर से 500 प्रतिनिधि शामिल होंगे, कई मुद्दों पर होगी चर्चा

देहरादून: देश में रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाली ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों के कर्मचारियों ने बड़ी हुंकार भरी है. लगातार आउटसोर्स से हो रही कर्मचारियों की रिप्लेसेंट और अन्य मांगों को लेकर संगठन देहरादून में अधिवेशन के रूप में एक बड़ी रणनीति बनाने जा रहा है.

देहरादून में AIDEF का राष्ट्रीय अधिवेशन: देश भर की रक्षा आयुध फैक्ट्रियों यानी ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों में कार्यरत कर्मचारियों की ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) देहरादून में अपना 28वां राष्ट्रीय अधिवेशन करने जा रही है. इसमें कर्मचारियों की राष्ट्रीय स्तर पर तमाम मांगों को लेकर रणनीति बनाई जाएगी. उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में ये अधिवेशन आज 7 मई से 9 मई 2026 तक आयोजित होगा. तीन दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में देशभर से लगभग 500 प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है. ये प्रतिनिधि रक्षा प्रतिष्ठानों, आयुध निर्माणियों, सेना, नौसेना, वायुसेना, डीआरडीओ, एमईएस और ईएमई समेत विभिन्न रक्षा इकाइयों से आएंगे.

3 लाख रक्षा असैनिक कर्मचारियों का संगठन है AIDEF: आपको बता दें कि देश की आजादी के बाद साल 1953 में स्थापित AIDEF (All India Defence Employees Federation) देश के करीब 3 लाख रक्षा असैनिक कर्मचारियों का सबसे बड़ा संगठन है. 24 मई 2026 को यह अपने स्थापना के 74वें वर्ष में प्रवेश करने जा रहा है. ऐसे में इस बार का सम्मेलन खास महत्व रखता है. आयोजन की जिम्मेदारी देहरादून की स्थानीय यूनियनों को सौंपी गई है, जिससे शहर श्रमिक आंदोलनों का बड़ा केंद्र बनता नजर आ रहा है.

आयुध फैक्ट्रियों के कॉरपोरेटाइजेशन का विरोध: देहरादून में होने जा रहे इस सम्मेलन में सबसे बड़ा मुद्दा आयुध फैक्ट्रियों के कॉरपोरेटाइजेशन को लेकर रहेगा. फेडरेशन का साफ कहना है कि सरकार द्वारा 41 आयुध निर्माणियों को कॉरपोरेट ढांचे में बदलने का फैसला कर्मचारियों और देश की रक्षा उत्पादन प्रणाली के हित में नहीं है. AIDEF इस फैसले को वापस लेने और ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड की पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग उठा रहा है.

सम्मेलन में इन मुद्दों पर भी होगी चर्चा: इसके अलावा सम्मेलन में कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा, आउटसोर्सिंग और निजीकरण पर रोक, संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण, अनुकंपा नियुक्ति की बहाली और पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा होगी. साथ ही श्रमिक विरोधी माने जा रहे नए लेबर कोड्स को खत्म करने की मांग भी जोर-शोर से उठेगी.

न्यूनतम वेतनमान और फिटमेंट फैक्टर की मांग: AIDEF ने 8वें वेतन आयोग को लेकर भी अपनी मांगें सामने रखी हैं. फेडरेशन का कहना है कि न्यूनतम मूल वेतन 69 हजार रुपये तय किया जाए और फिटमेंट फैक्टर 3.833 लागू किया जाए. इसके साथ ही कर्मचारियों को सेवा के दौरान कम से कम पांच पदोन्नतियां देने और पेंशन से जुड़ी विसंगतियों को दूर करने की मांग की जाएगी. फेडरेशन यह भी चाहता है कि उसे 8वें वेतन आयोग के सामने अपना पक्ष रखने का अवसर मिले.

तीन दिवसीय मंथन में जारी होगी ‘देहरादून घोषणा’: सम्मेलन के दौरान देश में श्रमिक वर्ग पर बढ़ते दबाव, निजीकरण की नीतियों और कर्मचारियों के अधिकारों पर पड़ रहे प्रभावों पर भी गंभीर चर्चा होगी. तीन दिवसीय मंथन के बाद सम्मेलन के समापन पर ‘देहरादून घोषणा’ जारी की जाएगी, जिसमें आगे की रणनीति और आंदोलन की रूपरेखा तय होगी.

फेडरेशन के अध्यक्ष एसएन पाठक और महासचिव सी श्रीकुमार का कहना है कि यह सम्मेलन सिर्फ रक्षा असैनिक कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह श्रमिक अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा और सार्वजनिक क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा राष्ट्रीय मंच साबित होगा.

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