आसाराम की आजीवन कारावास की सजा रहेगी बरकरार, सेवादार हुए बरी

इस मामले में पीड़िता के अधिवक्ता पीसी सोलंकी ने बताया कि कोर्ट ने सजा पर रोक नहीं लगाई है.

जोधपुरः आसाराम उर्फ आसुमल की यौन शोषण मामले में प्राकृतिक जीवन तक आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर अपील पर बुधवार को फैसला आया. हाईकोर्ट के जस्टिस अरुण कुमार मोंगा और योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने अपने फैसले में आसाराम को पूरी तरह से आरोप मुक्त नहीं किया है. उनकी सजा खत्म करने की अपील खारिज हुई है, लेकिन पॉक्सो एक्ट की गैर जमानती अपराध, आईपीसी की गैंग रेप और षड्यंत्र कर अपराध करने से जुड़ी धाराओं में दोषी नहीं माना है. खंडपीठ ने भारतीय दंड संहिता की दुष्कर्म, पॉक्सो की यौन शोषण और जेजे एक्ट सहित अन्य धाराओं को लेकर लोअर कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को सही ठहराया है, यानी सजा बरकरार रहेगी.

खंडपीठ ने आसाराम के सेवादार शरतचंद्र और शिल्पी को पूरी तरह से आरोप मुक्त कर दिया है. इस मामले में पीड़िता के अधिवक्ता पीसी सोलंकी ने बताया कि कोर्ट ने सजा पर रोक नहीं लगाई है. आजीवन कारावास की सजा बरकरार है, राहत जरूर दी है. सोलंकी ने बताया कि बरी किए गए आरोपियों के आदेश के खिलाफ पीड़िता से बात कर हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे. इस फैसले के बाद आसाराम को अब जेल में सरेंडर करना होगा.

20 अप्रैल को सुनवाई हुई थी पूरीः 20 अप्रैल को आसाराम, शरतचंद्र और शिल्पी की ओर से सजा के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई पूरी हुई थी. आसाराम और उसके सेवादारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत, अधिवक्ता दीपक मेनारिया और यशपाल सिंह राजपुरोहित ने पक्ष रखा. राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक चौधरी और पीड़िता की ओर से अधिवक्ता पीसी सोलंकी ने बहस की थी. सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने 20 अप्रैल 2026 को फैसला सुरक्षित रख लिया था.

अदालत ने सुनाई थी आजीवन कारावास की सजाः 25 अप्रैल 2018 को विशेष अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आसाराम को शेष प्राकृतिक जीवन तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. वहीं, सहआरोपी शिल्पी और शरतचंद को 20-20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी गई थी. इसी निर्णय को चुनौती देते हुए तीनों ने राजस्थान हाईकोर्ट में अपील दायर की थी.

अभी आसाराम चल रहा है जमानत परः आसाराम को सजा का फैसला जोधपुर जेल में ही अदालत में जाकर सुनाया था, इसके बाद लगातार आसाराम जेल में ही रहा. स्वास्थ्य जांच के लिए ही उसे बाहर लाया जाता था. वर्ष 2024 के मार्च में आसाराम को निजी अस्पताल में उपचार के लिए पहली बार 10 दिन की जमानत मिली थी. इसके बाद अंतराल के बाद उसे जमानत मिलती रही. वर्तमान में भी आसाराम अंतरिम जमानत पर बाहर है, दो दिन पहले इस जमानत की अवधि 7 जुलाई तक बढ़ाई गई है.

दर्जनों याचिकाएं, सुप्रीम कोर्ट तक गुहारः जेल में रहने के दौरान आसाराम के वकीलों द्वारा उसे जमानत पर बाहर लाने के लिए दर्जनों याचिकाएं हाईकोर्ट, निचली कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई. इन पर लंबी सुनवाईयां भी हुई, लेकिन 2024 से पहले तक आसाराम को कहीं से भी राहत नहीं मिली. मार्च 2024 में आसाराम को 10 दिन के लिए पहली बार उपचार के लिए जमानत मिली इसके बाद यह क्रम चलता रहा और वर्तमान में भी जारी है.

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