UKSSSC ने नकल और पेपर लीक रोकने के लिए टेक्नोलॉजी की मदद से निगरानी बढ़ा दी है. परीक्षा केंद्रों तक संपर्क और मॉनिटरिंग भी बढ़ाई.
देहरादून: पेपर लीक की शिकायतों के बीच उत्तराखंड में ऐसे फुलप्रूफ इंतजाम किए जा रहे हैं कि नकल या पेपर लीक की कोई संभावना ही ना रहे. इसके लिए उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने हाईटेक तकनीकों का उपयोग बढ़ाने के साथ निगरानी के सुरक्षा घेरों की भी संख्या बढ़ाने पर काम किया है. जिसके बाद आयोग खुद से सीधे परीक्षा केंद्रों की निगरानी कर सीधे केंद्रों को निर्देश भी दे सकेगा.
उत्तराखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) अब तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने जा रहा है. राज्य में पिछले सालों में सामने आए पेपर लीक मामलों के बाद आयोग ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव शुरू किए हैं. नई व्यवस्था के तहत संवेदनशील परीक्षा केंद्रों की निगरानी परीक्षा से दो दिन पहले ही शुरू कर दी जाएगी, जबकि आयोग मुख्यालय से सीधे परीक्षा केंद्रों तक संपर्क और मॉनिटरिंग की सुविधा भी विकसित की जा रही है.
प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी परीक्षा केंद्रों की होती है. अब तक फ्लाइंग स्क्वायड, निरीक्षकों और स्थानीय प्रशासन की मदद से निगरानी की जाती रही है, लेकिन पेपर लीक और नकल से जुड़े मामलों ने यह साबित किया है कि केवल पारंपरिक व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं. इसी कारण आयोग ने आधुनिक तकनीकों के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया है, ताकि मानवीय त्रुटियों और लापरवाही की संभावनाओं को न्यूनतम किया जा सके.
आयोग द्वारा परीक्षा केंद्रों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित कैमरे लगाए जा रहे हैं. इन कैमरों की मदद से परीक्षा केंद्रों पर होने वाली प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखी जा सकेगी. एआई तकनीक संदिग्ध गतिविधियों, प्रतिबंधित वस्तुओं या असामान्य व्यवहार की पहचान कर खुद अलर्ट जारी करने में सक्षम होगी. इससे परीक्षा संचालन के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका होने पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी.
इसके साथ ही आयोग अपने मुख्यालय में अत्याधुनिक कंट्रोल रूम स्थापित करने की तैयारी कर रहा है. इस कंट्रोल रूम से राज्य के विभिन्न परीक्षा केंद्रों की लाइव मॉनिटरिंग की जाएगी. खास बात यह है कि निगरानी केवल परीक्षा के दिन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि परीक्षा से पहले और बाद की गतिविधियों पर भी नजर रखी जाएगी.
आयोग का मानना है कि पेपर लीक या अन्य अनियमितताओं की संभावना केवल परीक्षा के समय ही नहीं बल्कि उससे पहले भी हो सकती है, इसलिए निगरानी का दायरा बढ़ाया गया है.
नई व्यवस्था के तहत संवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर हॉटलाइन या इंटरकॉम की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी. आयोग के अनुसार वर्तमान में परीक्षा केंद्रों पर जैमर लगाए जाते हैं, जिससे मोबाइल नेटवर्क और अन्य संचार माध्यमों को बाधित किया जा सके. यह व्यवस्था नकल रोकने और प्रश्नपत्र को बाहर भेजने की कोशिशों को विफल करने में मदद करती है. हालांकि जैमर सक्रिय होने के कारण आयोग और परीक्षा केंद्रों के बीच तत्काल संवाद में कठिनाई आती है. इसी समस्या को दूर करने के लिए हॉटलाइन और इंटरकॉम सिस्टम विकसित किया जा रहा है. इसके माध्यम से कंट्रोल रूम में बैठा अधिकारी किसी भी संदिग्ध गतिविधि या लापरवाही की स्थिति में सीधे परीक्षा केंद्र को निर्देश दे सकेगा.
अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए पहले से ही बायोमेट्रिक सत्यापन की व्यवस्था लागू की जा रही है. इससे फर्जी अभ्यर्थियों या प्रतिरूपण की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी. परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी की पहचान डिजिटल रूप से सत्यापित की जाएगी, जिससे परीक्षा प्रक्रिया और अधिक विश्वसनीय बनेगी.
आयोग ने निगरानी व्यवस्था को केवल परीक्षा केंद्रों तक सीमित नहीं रखा है. प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट से जुड़े संवेदनशील क्षेत्रों में भी विशेष सुरक्षा प्रबंध किए जा रहे हैं. कंट्रोल रूम और उन स्थानों पर जहां प्रश्नपत्र या ओएमआर शीट रखी जाती हैं, वहां अलग से निगरानी तंत्र विकसित किया गया है. आयोग के अनुसार, इन स्थानों पर निर्धारित संख्या से अधिक लोगों की मौजूदगी होने पर स्वचालित अलार्म बजने लगेगा. उदाहरण के तौर पर यदि किसी कमरे में अधिकतम पांच लोगों की ड्यूटी निर्धारित है और कोई छठा व्यक्ति प्रवेश करता है तो सिस्टम तुरंत इसकी सूचना आयोग तक पहुंचा देगा.
उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष जीएस मार्तोलिया का कहना है कि,
आयोग ने परीक्षा प्रणाली में तकनीक के उपयोग को काफी बढ़ाया है. आधुनिक तकनीकों की मदद से परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाया जा सकता है. साथ ही मानवीय गलतियों और लापरवाही की संभावना को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा. आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को निष्पक्ष अवसर मिले और किसी भी प्रकार की अनियमितता के कारण उनके भविष्य पर असर न पड़े.
-जीएस मार्तोलिया, अध्यक्ष, उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग-
दूसरी तरफ राज्य के युवाओं में पेपर लीक मामलों को लेकर लंबे समय से नाराजगी रही है. विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में सामने आए घोटालों ने हजारों अभ्यर्थियों की मेहनत और समय को प्रभावित किया है. युवाओं का कहना है कि पेपर लीक केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं है, बल्कि यह सीधे उनके भविष्य और करियर से जुड़ा विषय है. परीक्षा स्थगित होने या रद्द होने से अभ्यर्थियों को मानसिक, आर्थिक और शैक्षणिक नुकसान उठाना पड़ता है.
युवाओं ने आयोग की नई तकनीकी पहल का स्वागत किया है. उनका मानना है कि यदि एआई आधारित निगरानी, बायोमेट्रिक सत्यापन, लाइव मॉनिटरिंग और हॉटलाइन जैसी व्यवस्थाओं का प्रभावी तरीके से संचालन किया जाए तो पेपर लीक और नकल की घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आयोग को तकनीक के साथ-साथ जवाबदेही तय करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में भी काम करना चाहिए.
उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह तकनीक आधारित और पारदर्शी बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. एआई कैमरे, लाइव कंट्रोल रूम, बायोमेट्रिक सत्यापन, जैमर, इंटरकॉम और बहुस्तरीय निगरानी जैसे कदम आने वाले समय में भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. आयोग को उम्मीद है कि इन व्यवस्थाओं से अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत होगा और राज्य में निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित की जा सकेगी.
मुंबई से गिरफ्तार आरोपी उत्तराखंड में जनता से जमा राशि जुटाने और विभिन्न शाखाओं का…
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में 276 युवाओं को विभिन्न विभागों में नियुक्ति पत्र…
देहरादून के डोईवाला में मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने कंडोगल-थानो मार्ग पर स्थित एक अवैध…
न्यायाधीश आशीष नैथानी ने कई अहम फैसलों से न्यायपालिका को नई ऊंचाइयां दी. नैनीताल में…
उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल से चार दिन से लापता महिला ट्रेकर का पता लगाने के…
उत्तराखंड में भी इलेक्ट्रिक वाहनों, सीएनजी वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे प्रदूषण…