मसूरी एमपीजी कार्यवाहक प्राचार्य में हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी.
नैनीताल: उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकल पीठ ने मसूरी एमपीजी कॉलेज में कार्यवाहक प्राचार्य के पद पर वरिष्ठता के अनुसार नियुक्ति न करने के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई की. आदेश का अनुपालन ना करने पर यह याचिका डॉ. शालिनी गुप्ता द्वारा दायर की गई है, जिसमें उन्होंने अदालत के पूर्व आदेश की जानबूझकर और अवज्ञा करने का आरोप लगाया है. अवमानना याचिका में कहा है कि कोर्ट के आदेश होने के बाद भी उन्हें गुमराह किया जा रहा है.
याचिकाकर्ता के अनुसार, इससे पहले रिट याचिका में उच्च न्यायालय ने विश्वविद्यालय के कुलपति को आदेश दिया था कि वे तीन सप्ताह के भीतर प्रतिवादी डॉ. सुनील पंवार द्वारा दायर अपील का कानूनन निस्तारण करें. अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया था कि अपीलीय प्राधिकारी द्वारा जिसे भी वरिष्ठ घोषित किया जाएगा, उसे कार्यवाहक प्राचार्य का प्रभार सौंप दिया जाए. लेकिन कुलपति द्वारा 13 मई 2026 को अपील पर निर्णय लिए जाने के बाद भी याचिकाकर्ता को अब तक यह प्रभार नहीं सौंपा गया है.
अदालत को यह भी अवगत कराया गया कि वरिष्ठता सूची में शीर्ष पर मौजूद प्रोफेसर सेवानिवृत्त हो चुकी हैं और दूसरे स्थान के प्रोफेसर इस पद को संभालने के इच्छुक नहीं हैं. जिसके चलते वर्तमान में प्रभार संभाल रहे व्यक्ति की तुलना में याचिकाकर्ता वरिष्ठ हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च न्यायालय ने प्रतिवादी-अवमाननाकर्ता मीरा सकलानी को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है. इसके साथ ही अदालत ने प्रतिवादियों को अवमानना याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने या आदेश का अनुपालन करने का आदेश देते हुए अगली सुनवाई 25 अगस्त 2026 तय की है.
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