10 साल बाद परिवार से मिला लापता शख्स, परिजन हुए भावुक, पुलिस की ये ट्रिक आई काम

रानीखेत मजखाली पुलिस ने लापता बुजुर्ग व्यक्ति को परिवार से मिलाया. वहीं लापता पिता को सामने पाकर परिवार भावुक हो पड़ा.

रानीखेत: रानीखेत से एक भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है. पुलिस को अक्सर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाते हुए देखा जाता है, लेकिन कई बार वही पुलिस मानवता की ऐसी मिसाल भी पेश करती है जो लोगों के दिलों को छू जाती है. ऐसा ही एक मामला रानीखेत के मजखाली क्षेत्र से सामने आया है, जहां नव नियुक्त चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक विनोद फर्त्याल की सूझबूझ और संवेदनशीलता के चलते करीब 10 वर्षों से लापता एक मानसिक रूप से अस्वस्थ बुजुर्ग आखिरकार अपने परिवार से मिल गया. यह पुनर्मिलन पूरे परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था.

अल्मोड़ा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चंद्रशेखर आर घोड़के के निर्देशन में जनपद पुलिस कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ मानवीय सरोकारों को भी प्राथमिकता दे रही है. इसी क्रम में मजखाली चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक विनोद फर्त्याल की नजर एक ऐसे बुजुर्ग पर पड़ी, जो पिछले कई वर्षों से मजखाली और ताड़ीखेत क्षेत्र में इधर-उधर भटक रहा था. मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण वह अपनी पहचान स्पष्ट नहीं बता पा रहा था. पुलिस उन्हें सम्मानपूर्वक चौकी लेकर आई और लगातार बातचीत कर उनके परिजनों तक पहुंचने का प्रयास किया, लेकिन शुरुआती कोशिशों में कोई सफलता नहीं मिली.

इसके बाद पुलिस ने अलग तरीका अपनाया. बुजुर्ग को एक डायरी और पेन दिया गया, ताकि वह जो याद हो उसे लिख सकें. उन्होंने डायरी में सिर्फ एक शब्द लिखा “राजेपुर”. इसी छोटे से सुराग को आधार बनाकर मजखाली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जनपद के थाना राजेपुर से संपर्क किया. फोटो और अन्य विवरण साझा कर सत्यापन कराया गया. करीब चार दिनों की लगातार पड़ताल के बाद पुलिस ने बुजुर्ग की पहचान श्याम सिंह के रूप में कर ली और उनके परिवार का पता भी लगा लिया. सूचना मिलते ही श्याम सिंह का पुत्र और अन्य परिजन मजखाली चौकी पहुंचे.वर्षों बाद अपने पिता को सकुशल सामने देखकर पूरा परिवार भावुक हो उठा और सभी की आंखें नम हो गईं. परिजनों ने बताया कि मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण श्याम सिंह लगभग 10 वर्ष पहले घर से लापता हो गए थे. काफी तलाश के बावजूद उनका कोई पता नहीं चल पाया था. एक दशक बाद यह मिलन संभव हो सका तो परिवार ने अल्मोड़ा पुलिस, उत्तराखंड पुलिस और विशेष रूप से चौकी प्रभारी विनोद फर्त्याल का हृदय से आभार व्यक्त किया. यह घटना साबित करती है कि संवेदनशील पुलिसिंग केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि किसी बिछड़े परिवार की खुशियां लौटाने का माध्यम भी बन सकती है.

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