बसंत विहार थाने में तीसरी FIR दर्ज होने के बाद तीनों मुकदमों में नामजद आरोपियों की संख्या 6 हो गई है
देहरादून: उत्तराखंड नीट यूजी फेक सर्टिफिकेट मामले में एक और मुकदमा दर्ज हो गया है. राजधानी में एमबीबीएस दाखिले के लिए फर्जी प्रमाण पत्रों के इस्तेमाल के मामले में अब तीसरा थाना बसंत विहार में मुकदमा दर्ज हुआ है. आरोप है कि एलिस तोमर ने तहसील सदर से स्थायी निवास प्रमाण पत्र और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाने के लिए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आवेदन किया.
एमबीबीएस दाखिला फर्जीवाड़े में तीसरा मुकदमा दर्ज: राजस्व विभाग की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर आवेदन में बताए गए पते पर स्थलीय सत्यापन कराया गया तो ललित तोमर (एलिस तोमर) वहां निवासरत नहीं मिला. जांच में आवेदन के साथ लगाए गए दस्तावेज भी फर्जी पाए गए. इसके बाद बसंत विहार थाने में ललित तोमर के खिलाफ BNS की धारा 318(4), 336(3), 338 और 340(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया.
दो प्रमाण पत्रों के लिए किया था आवेदन: राजस्व विभाग की कर्मचारी स्वाति ने थाना बसंत विहार में शिकायत दर्ज कराई है कि एलिस तोमर ने 16 राम विहार, हरिद्वार-कांवली क्षेत्र का निवासी बताते हुए तहसील सदर के तहत स्थायी निवास प्रमाण पत्र और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था. दोनों आवेदनों के नंबर भी FIR में दर्ज किए गए हैं. सत्यापन के दौरान बताए गए पते पर आवेदक का निवास नहीं मिला और आवेदन में लगाए गए दस्तावेजों की सत्यता पर भी सवाल खड़े हुए.
पहले से दर्ज हैं दो मुकदमे: एमबीबीएस दाखिले में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के प्रमाण पत्रों की जांच के दौरान यह फर्जीवाड़ा सामने आया था. इसके बाद रायपुर और क्लेमेंटाउन थानों में अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए थे. रायपुर मामले में तीन छात्राओं जबकि क्लेमेंटटाउन मामले में एक छात्रा और उनकी मां नामजद हैं. वहीं अब बसंत विहार थाने में तीसरी FIR दर्ज होने के बाद तीनों मुकदमों में नामजद आरोपियों की संख्या 6 हो गई है.
एसआईटी कर रही जांच, अब तक 12 गिरफ्तार: रायपुर और क्लेमेंटाउन के दोनों मुकदमों की जांच के लिए गठित एसआईटी फर्जी प्रमाण पत्र मामले की जांच कर रही है. पुलिस के मुताबिक, अब तक इस मामले में देहरादून में एसआईटी ने पांच गिरफ्तारी की हैं. अन्य जनपदों में पुलिस ने 07 गिरफ्तारी की हैं. एमबीबीएस फर्जी सर्टिफिकेट मामले में इस तरह अब तक कुल 12 लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है.
एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने बताया है कि-
तीसरे मुकदमे के बाद जांच का दायरा भी बढ़ गया है. पुलिस और एसआईटी अलग-अलग तहसीलों से जारी प्रमाण पत्रों, आवेदनों में लगाए गए दस्तावेजों और MBBS काउंसलिंग के दौरान जमा रिकॉर्ड का मिलान कर रही है. साथ ही जांच में यह भी देखा जा रहा है कि फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कराने और उनका इस्तेमाल करने में कितने लोग शामिल हैं और इनका इस्तेमाल दाखिले की प्रक्रिया में किस स्तर तक किया गया.
-प्रमेंद्र डोबाल, एसएसपी, देहरादून-
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