मुनस्यारी में पातलथौड़ क्षेत्र में एक अति दुर्लभ और संकटग्रस्त लाल सिर वाला गिद्ध देखा गया है. जिससे पक्षी प्रेमियों में खुशी की लहर है.
पिथौरागढ़ (उत्तराखंड): मुनस्यारी के पातलथौड़ में अति दुर्लभ रेड हेडेड वल्चर कैमरे में कैद हुआ है. पक्षी संरक्षण के लिए काम करने वाली मोनाल संस्था के सदस्यों ने न सिर्फ इस गिद्ध को देखा, बल्कि कैमरे में इसकी तस्वीरें और वीडियो भी रिकॉर्ड किए. पातलथौड़ में लाल सिर वाला गिद्ध दिखने के बाद पक्षी प्रेमियों में खुशी की लहर है. वहीं इसे जैव विविधता और पक्षी संरक्षण के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है.
लाल सिर वाला गिद्ध भारत में पाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण शिकारी एवं मृतजीवी पक्षी है. इसका वैज्ञानिक नाम Sarcogyps calvus है. इसके सिर और गर्दन का रंग लाल तथा शरीर का अधिकांश भाग काला होता है. यह मुख्य रूप से मृत पशुओं के मांस पर निर्भर रहता है और प्रकृति में सफाईकर्मी की महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. एक समय यह प्रजाति भारतीय उपमहाद्वीप में काफी सामान्य थी, लेकिन आवास में कमी, भोजन की उपलब्धता घटने और पशु चिकित्सा में कुछ हानिकारक दवाओं के उपयोग के कारण इसकी संख्या में भारी गिरावट आई है.
इसे अति संकटग्रस्त (Critically Endangered) श्रेणी में रखा गया है. हिमालयी पक्षियों के लिए प्रसिद्ध मुनस्यारी में एक अति दुर्लभऔर संकटग्रस्त रेड हेडेड वल्चर (लाल सिर वाला गिद्ध) दिखाई दिया है. करीब 2650 मीटर की ऊंचाई पर पातलथौड़ क्षेत्र में देखे गए इस गिद्ध की तस्वीरें और वीडियो भी कैमरे में रिकॉर्ड किए गए हैं. इतनी ऊंचाई पर इसकी मौजूदगी दर्ज होना क्षेत्र की जैव विविधता और पक्षी संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
मुनस्यारी नगर से ऊपर बलाती बैंड के नीचे स्थित पातलथौड़ क्षेत्र में पक्षी एवं प्रकृति संरक्षण के लिए काम करने वाली मोनाल संस्था के सदस्यों ने इस दुर्लभ गिद्ध को देखा. संस्था के सुरेंद्र पंवार, प्रकाश राणा और कविंद्र पंवार क्षेत्र में बर्ड वाचिंग कर रहे थे. इसी दौरान उन्हें रेड हेडेड वल्चर दिखाई दिया. सुरेंद्र पंवार ने इसकी तस्वीरें कैमरे में कैद कीं, जबकि इसकी गतिविधियों का वीडियो भी रिकॉर्ड किया गया. वैज्ञानिक नाम सार्कोजिप्स कालवस (Sarcogyps calvus) वाला यह गिद्ध वर्तमान में गंभीर रूप से संकटग्रस्त (Critically Endangered) श्रेणी में शामिल है.
पिछले कुछ दशकों में भारतीय उपमहाद्वीप में इसकी संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. इसके कारण इस प्रजाति का किसी नए क्षेत्र में प्रमाणिक फोटो और वीडियो के साथ दर्ज होना पक्षी विशेषज्ञों के लिए खास महत्व रखता है. मोनाल संस्था के अनुसार, पिथौरागढ़ जिले के निचले क्षेत्रों में इस गिद्ध के पुराने रिकॉर्ड मिलते रहे हैं, लेकिन मुनस्यारी में करीब 2650 मीटर की ऊंचाई पर इसकी मौजूदगी का दस्तावेजीकरण विशेष है. इससे संकेत मिलता है कि मुनस्यारी का पर्वतीय भूभाग दुर्लभ पक्षी प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण आवास क्षेत्र हो सकता है.
मोनाल संस्था के सुरेंद्र पंवार ने बताया कि मुनस्यारी पहले से ही बर्ड वाचिंग और नेचर टूरिज्म के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र है. रेड हेडेड वल्चर जैसी संकटग्रस्त प्रजाति का यहां दिखाई देना क्षेत्र की जैव विविधता को बताता है. उन्होंने कहा कि ऐसे दुर्लभ पक्षियों की नियमित निगरानी और व्यवस्थित दस्तावेजीकरण से इनके संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई जा सकती है.
स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी रहे स्वर्गीय गिरधर सिंह बिष्ट के निधन मामले में…
उत्तराखंड में अब हर महीने की 9 तारीख को सुबह 11 बजे भूकंप का सायरन…
भागीरथी कैचमेंट के जंगलों की सेहत को लेकर बड़ी स्टडी की गई है, जिसमें कई…
डॉक्टर ने खुलासा किया कि तड़के 4.30 बजे नाना पाटेकर को मृत अवस्था में अस्पताल…
टेड्रोस के मुताबिक रूस ने जवाब दिया कि प्लेग का कोई मामला सामने नहीं आया…
जोधपुर में चल रहे 'तरंग शक्ति 2026' में 10 अक्टूबर को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह पहुंचेंगे,…