जोत सिंह बिष्ट, सुभाष रमोला, रोहित रावत, आनंद बेलवाल और वीरेंद्र राणा सहित कई अतिथि रहे मौजूद

रिपोर्ट: सुनील सजवाण

थत्यूड़ (टिहरी गढ़वाल):  जौनपुर विकासखंड मुख्यालय थत्यूड़ में धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक समिति के तत्वावधान में आयोजित पौराणिक रामलीला के चतुर्थ दिवस शिव धनुष भंग, माता सीता के स्वयंवर तथा भगवान परशुराम और लक्ष्मण के बीच संवाद की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। इस दौरान प्रभु श्रीराम द्वारा शिव धनुष तोड़ने के दृश्य ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार के राज्य मंत्री जोत सिंह बिष्ट, जिला सहकारी बैंक टिहरी गढ़वाल के अध्यक्ष सुभाष रमोला सहित अनेक गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।

शिव धनुष भंग होते ही गूंजे जय श्रीराम के जयकारे

रामलीला के प्रथम प्रसंग में गुरु विश्वामित्र के आश्रम में मिथिला पुरी से माता सीता के स्वयंवर का समाचार पहुंचता है। इसके बाद भगवान श्रीराम और लक्ष्मण गुरु विश्वामित्र से मिथिला पुरी चलने का आग्रह करते हैं। गुरु विश्वामित्र दोनों भाइयों को साथ लेकर मिथिला के लिए प्रस्थान करते हैं, जहां उनका स्वागत किया जाता है।
इसके बाद पुष्प वाटिका का मनोहारी दृश्य प्रस्तुत किया गया। यहां माता सीता गौरी माता की पूजा-अर्चना करती हैं और इसी दौरान उनकी भेंट भगवान श्रीराम और लक्ष्मण से होती है।
अगले दृश्य में माता सीता के स्वयंवर का आयोजन होता है, जिसमें विभिन्न राज्यों के राजा शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने के लिए पहुंचते हैं। रावण भी स्वयंवर में आता है, लेकिन आकाशवाणी के बाद वह वापस लंका लौट जाता है और सीता को लंका ले जाने की प्रतिज्ञा करता है।
स्वयंवर में उपस्थित राजा शिव धनुष को उठाने का प्रयास करते हैं, लेकिन कोई भी सफल नहीं हो पाता। यह देखकर महाराजा जनक निराश हो जाते हैं और क्षत्रिय वंश की वीरता पर सवाल उठाते हैं। इस दौरान लक्ष्मण और महाराजा जनक के बीच संवाद होता है।
इसके बाद गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम शिव धनुष उठाते हैं और उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास करते हैं। इसी दौरान प्राचीन शिव धनुष टूट जाता है। धनुष भंग होते ही रामलीला मैदान में जय श्रीराम के जयकारे गूंज उठते हैं। इसके बाद माता सीता भगवान श्रीराम को जयमाला पहनाती हैं।

परशुराम-लक्ष्मण संवाद ने बांधा समां

शिव धनुष टूटने का समाचार मिलने पर भगवान परशुराम क्रोधित होकर मिथिला पहुंचते हैं और महाराजा जनक से धनुष तोड़ने वाले के बारे में पूछते हैं। इसके बाद लक्ष्मण और परशुराम के बीच तीखा संवाद होता है। अंततः परशुराम को एहसास होता है कि शिव धनुष तोड़ने वाले भगवान श्रीराम कोई साधारण पुरुष नहीं, बल्कि साक्षात् नारायण के स्वरूप हैं। इस प्रसंग का कलाकारों ने प्रभावशाली मंचन किया।

इन कलाकारों ने निभाई विभिन्न भूमिकाएं

चतुर्थ दिवस की रामलीला में भगवान श्रीराम की भूमिका मनोज नट्ट, लक्ष्मण की भूमिका प्रवीण पंवार, रावण की भूमिका सचिन लेखवार, महाराजा जनक की भूमिका दीपेंद्र रावत, बाणासुर की भूमिका हरि लेखवार, मंत्री की भूमिका दीपक सजवाण तथा गुरु विश्वामित्र की भूमिका दीपक सकलानी ने निभाई। अन्य कलाकारों ने भी विभिन्न पात्रों के माध्यम से रामलीला को जीवंत बनाया।

कई जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य अतिथि रहे मौजूद

चतुर्थ दिवस की रामलीला में उत्तराखंड ग्रामीण अभियंत्रण परिषद के उपाध्यक्ष एवं राज्य मंत्री जोत सिंह बिष्ट, जिला सहकारी बैंक टिहरी गढ़वाल के अध्यक्ष सुभाष रमोला, भाजपा युवा मोर्चा उत्तराखंड के महामंत्री रोहित रावत, जिला कांग्रेस कमेटी टिहरी गढ़वाल के प्रवक्ता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद सिंह बेलवाल, जौनपुर महोत्सव समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र राणा, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य जयपाल कैरवाण तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खंड कार्यवाहक रमन रावत सहित अनेक अतिथि उपस्थित रहे।
रामलीला समिति की ओर से अध्यक्ष गजेंद्र असवाल, सचिव सुनील सजवाण, उपाध्यक्ष रामप्रकाश भट्ट, कोषाध्यक्ष मुनिम प्रधान, संगीतकार संदीप पंवार, साज-सज्जा प्रमुख हरिलाल, विनोद राणा और हरीश नौटियाल सहित समिति के अन्य सदस्य मौजूद रहे।
कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध मंच संचालक सुनील सजवाण ने किया। थत्यूड़ की पौराणिक रामलीला के माध्यम से क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के साथ ही भगवान श्रीराम के आदर्शों और भारतीय संस्कृति का संदेश जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है।

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