सिख गुरुओं का बलिदान विश्व भर में अनन्य – आर्यम जी महाराज।

मसूरी : सिख गुरुओं की चार पीढ़ियों द्वारा हिंदुत्व की अस्मिता और सम्मान हेतु मर मिटने की मिसाल अपने आप में नायाब है, विश्व भर में ऐसी कोई दूसरी घटना कहीं भी देखने को प्राप्त नहीं होती। यह उदगार परम प्रज्ञ जगतगुरु प्रोफ़ेसर पुष्पेंद्र कुमार महाराज जी ने व्यक्त किए। देर रात मेरठ में गुरु तेग बहादुर जी के 400 वें प्रकाश पर्व को बतौर मुख्य वक्ता सम्बोधित कर रहे थे।


गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा थापर नगर मेरठ के तत्त्वावधान में सिखों के नौवें गुरु श्री तेगबहादुर जी का 400 वाँ प्रकाश पर्व मनाया गया। शुक्रवार देर रात आयोजित भव्य समारोह को सम्बोधित करते हुए प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु प्रोफ़ेसर आर्यम जी महाराज ने कहा कि हिंदुओं की धार्मिक मूल्यों की रक्षा हित सिख गुरुओं के अनन्य योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदुओं के दिव्य धार्मिक संस्कारों और प्रतीक मूल्यों जिनमें तिलक, जनेऊ और शिखा शामिल है, इसीलिए बची रह सकीं क्योंकि गुरु तेग बहादुर जी ने इनकी रक्षा और सम्मान हित अपना शीश न्यौछावर कर दिया था। आर्यम इंटेरनेशनल फ़ाउंडेशन के संस्थापक और भगवान शंकर आश्रम के कुल प्रमुख प्रोफ़ेसर पुष्पेंद्र कुमार आर्यम जी महाराज इस अवसर पर अपना मुख्य उद्बोधन देने विशेष रूप से मसूरी से मेरठ पधारे। उन्होंने सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि गुरु अर्जुन देव, गुरु तेग बहादुर, गुरु गोविंद सिंह और उनके चार साहबज़ादों के बलिदान की चार पीढ़ियों के त्याग और शहादत की दूसरी मिसाल कहीं नहीं मिलती। अपने धर्म अपने विचार और अपने मूल्यों के लिए संघर्ष की दास्तानों से इतिहास भरा पड़ा है लेकिन दूसरे धर्म के लिए सर्वस्व स्वाहा कर देने कि यह अद्भुत मिसाल सदा सर्वदा सिख पंथ के माथे की शोभा रहेगी। आर्यम जी महाराज ने गुरु तेग बहादुर के बलिदान दिवस को राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने की भी माँग की। उन्होंने 12 सितम्बर 1897 को सारा गढ़ी के संग्राम का वृतांत साँझा किया कि किस तरह मात्र 21 सिख जवानों ने 10 हज़ार अफ़ग़ानी शत्रुओं के दांत खट्टे कर दिए थे। उन्होंने बताया कि इस कहानी को यूनेस्को द्वारा स्टोरी ऑफ ब्रेवेरी के नाम से दर्ज किया गया है जबकि फ्रांस के बच्चों को यह कहानी उनके पाठ्यक्रम में शामिल करके पढ़ाई जाती है। यह भारतीय स्कूली पाठ्यक्रम का भी हिस्सा होना चाहिए। इस अवसर पर गुरु आर्यम जी महाराज को सरोपा और पगड़ी के साथ साथ सम्मान स्वरूप तलवार भी भेंट की गई। समारोह के आयोजन में गुरुद्वारा प्रबंधन की ओर से अविनाश सिंह अलग , सरदार रणजीत सिंह, हरप्रीत सिंह, अमरजीत सिंह, ग़ुरमुख सिंह, सुरेंद्र सिंह भाटिया, गुरदीप सेठी आदि का विशेष योगदान रहा।
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