आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी पहुंची नृसिंह मंदिर जोशीमठ, श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर किया आदि ग गुरु शंकराचार्य गद्दी और रावल जी का स्वागत।

विनय उनियाल

चमोली/जोशीमठ : नृसिंह मंदिर जोशीमठ में आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी विराजित हो गई है। अब छह माह शंकराचार्य गद्दी के दर्शन जोशीमठ के नृसिंह मंदिर में होंगे।
आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी नृसिंह मंदिर जोशीमठ में विराजित हो गई है। अब छह माह शंकराचार्य गद्दी के दर्शन जोशीमठ के नृसिंह मंदिर में होंगे। छह माह बदरीनाथ धाम में गद्दी के दर्शन होते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।
आदि गुरु शंकराचार्य गद्दी की पूजा अर्चना के बाद सुबह योगध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर से डोली को रवाना किया गया। इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने गद्दी की पूजा अर्चना की। बदरीनाथ धाम के मुख्य पुजारी रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी और ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अवि मुक्तेश्वरानन्द जी के सानिध्य में शंकराचार्य गद्दी को यात्रा के साथ जोशीमठ नृसिंह मन्दिर स्थित मठ आंगण परिसर में लाया गया। यहां पर लोगों ने फूल वर्षा कर शंकराचार्य गद्दी का स्वागत किया।


पूजा अर्चना के बाद आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी जो जोशीमठ के नृसिंह मंदिर के समीप शंकराचार्य गद्दी स्थल में विराजित किया गया। शीतकाल के दौरान जहां भवगान नारायण अपने दर्शन योगध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर और जोशीमठ नृसिंह मंदिर में देंगे वहीं शंकराचार्य गद्दी के दर्शन जोशीमठ के नृसिंह मंदिर में होंगे। इस दौरान धर्माधिकारी राधा कृष्ण थपलियाल,मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी योगेन्द्र सिंह, वेदपाठियों के अलावा कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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