पंतवाड़ी, बांडासारी नहर की दुर्दशा से ग्रामीणों में आक्रोश।

टिहरी : जौनपुर विकास खंड के नैनबाग क्षेत्र के सबसे बड़े कृषि बागान क्षेत्र पंतवाड़ी, पंतवाड़ी नहर है जो अपनी दुर्दशा के कारण किसानों पर भारी पड़ रही है। बताया गया कि जब से यह नहर बनी तब से आज तक इसकी मरम्मत नहीं की गई जिसके कारण किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। वहीं अधिकारी नहर की दुर्दशा को गलत बता रहे हैं।

नैनबाग से लगे पंतवाड़ी बांडासारी नहर 1975 में बनी थी जो कि एक किमी, की है लेकिन इस नहर से सात गांवा लाभान्वित होते थे लेकिन नहर की मरम्मत न किए जाने के कारण काश्तकारों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है तथा उन्हें नकदी फसलों सहित पारंपरिक फसलों को भारी नुकसान हो रहा है। स्थनीय काश्तकार व नागटिब्बा विकास समिति के अध्यक्ष देवेंद्र पंवार सहित ग्रांम प्रधान बिनाउं, प्रधान बांडासारी गीता देवी, प्रधान पंतवाड़ी सविता देवी, बलबीर रावत, अनीता, विरेंद्र पंवार, मिजान सिह आदि का कहना है कि नहर की मरम्मत न होने से काश्तकारों के खेतों को पानी नही मिल पा रहा है यहां तक कि नहर में उपर इतनी झाड़ियां उग गई हैं कि नहर दिखती ही नहीं किसी तरह काश्तकार नहर में जहां टूटी है उसे मिटटी आदि से लेप कर खेतों में पानी पहुंचाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सिंचाई विभाग की इस घोर लापरवाही से ग्रामीण परेशान हैं इसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों सहित सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारियों व जिलाधिकारी तक की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जबकि यह नहर क्षेत्र की सबसे उपजाउ भूमि को सिंचित करती है। तथा यहां के सात गांवों के ग्रामीणों के जीवन यापन का यहीं एक माात्र साधन है। उन्होंने मांग की कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए तथा नहर की मरम्मत की जानी चाहिए। इस संबध में सहायक अभियंता विवेक शर्मा ने कहाकि विभाग ने इस क्षेत्र की छह नहरों को नाबार्ड को दिया है जिसके माध्यम से नहरों की मरम्मत शीध्र की जायेगी। जिसमें पंतवाड़ी, बांडासारी की नहर को प्राथमिता के आधार पर रखा है, वहीं उन्होंने ग्रामीणों के आरोपों निराधार बताया। आश्चर्य की बात तो यह है कि इस क्षेत्र में सिंचाई विभाग का कोई अधिकारी गया ही नहीं वरना ऐसी निराधार बात नहीं करता क्यों कि विभाग के नियमों के अनुसार साल में दो बार नहरों की सफाई व झाड़ी कटान होना चहिए जबकि यहां झाडियों की बीच नहर नजर नहीं आ रही व इसका वीडियों संबंधित विभाग के एसडीओ को भेजा गया है।

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