गंगा को निर्मल बनाने के लिये पर्यावरण जरूरी – लोकेद्रं बिष्ट

अरविन्द थपलियाल

उत्तरकाशी : गंगा विचार मंच के प्रदेश संयोजक लोकेंद्र सिंह बिष्ट ने आज विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उपस्थित माँगलिसेरा के ग्रामीणों, मंच के कार्यकर्ताओं व वनकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि माँ गंगा को निर्मल, अविरल बहते रहने के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाने की आवश्यकता है। लोकेन्द्र सिंह बिष्ट ने कहा कि जंगल हैं तो जल है, जल है तो माँ गंगा अविरल है। इसी मंत्र को आज आत्मसात करने की जरूरत है।
कार्यक्रम में डुंडा ब्लॉक प्रमुख शैलेंद्र कोहली ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस के दिन पौध रोपण समूचे विश्व के पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण हेतु पूरे जरूरी है।
कार्यक्रम में डुंडा रेंज के रेंजर पूजा बिष्ट ने कहा कि जंगलों की सुरक्षा और संवर्धन ही विभाग का मूल कार्य है।
गौरतलब है कि आज 5 जून को पहले से ही प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत गंगा विचार मंच उत्तराखंड व उत्तरकाशी वन प्रभाग के संयुक्त तत्वावधान में सिंगोट बीट के माँगलिसेरा बरसाली में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। इस दिवस पर गंगा विचार मंच के कार्यकर्ताओं, ग्रामीणों व वनविभाग के अधिकारियों व वनकर्मियों ने देवदार, बांझ के 200 पौधों का रोपण किया व पहले से रोपे गए देवदार, बांझ, बुरांश, काफल के पेड़ों के थाल बनाये, पेड़ों की निराई गुड़ाई की गई। साथ ही मंच के कार्यकर्ताओं के साथ गंगा प्रहरियों व वनकर्मियों ने 5 हेक्टेयर क्षेत्रफल में झाड़ियों को हटाया।


डिप्टी रेंजर प्यारेलाल प्रजापति ने कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि पर्यावरण की रक्षा के लिए प्रतिवर्ष दो पेड़ अवश्य लगाने चाहिये।
वन दारोगा ख़िलानंद लेखवार ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कहा कि पर्यावरण के संबर्धन के लिए जंगलों को आग से बचाना, वन माफियों से बचाना व सघन वृक्षारोपण की आवश्यकता है।
प्रवक्ता राजेन्द्र सिंह बिष्टने कहा कि मानव जीवन के लिए वृक्ष ही सबसे महत्वपूर्ण है। जंगलों से ही मानव जीवन की सुरक्षा के लाए तमाम तरह की बेशकीमती जड़ी बूटियां प्राप्त होती हैं।।
आज के कार्यक्रम प्रधान बरसाली सरिता बिष्ट, क्षेत्र पंचायत सदस्य गीता बिष्ट, डुंडा बीरपुर प्रधान सुनीता, पूर्व प्रधान गिरबीर बिष्ट, अमेन्द्र बिष्ट, सौरभ बिष्ट, अनमोल बिष्ट, गंगा विचार मंच के गजेंद्र बिष्ट, डिप्टी रेंजर प्यारेलाल प्रजापति, वन दारोगा खिलानंद लेखवार, वन दारोगा रामलाल, फारेस्ट गार्ड शिवेंद्र चौहान, उदय सिंह रावत, रामेन्द्र बिष्ट, अमेन्द्र बिष्ट, प्रमेन्द्र बिष्ट, गंगा प्रहरी कमला बिष्ट कुसुम बिष्ट, साहिल, राजेश, सुशील बिष्ट, शिक्षा विभाग से सुनील बिष्ट , प्रवक्ता राजेन्द्र अंग बिष्ट सुचिता विष्ट, रीना, इंदु, गंगा प्रहरी प्रखर बिष्ट, यशस्वी, अक्षित, साहिल उपस्थित थे।
आपको बताते चलें कि गंगा विचार मंच के प्रदेश संयोजक लोकेन्द्र सिंह बिष्ट ने सिंगोट बीट के माँगलीसेरा बरसाली में वे ग्रामवासियों की मदद से बांझ व देवदार के जंगल को उगाने, बचाने का पुनीत कार्य कर रहे हैं। आज इस 5 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बांझ का एक खूबसूरत जंगल उग आया है। साथ मे देवदार के पेड़ों की अच्छी खासी तादात उग आई है।
इस जंगल मे आज 5 हजार बांझ, बुरांश व काफल के बृक्षों के साथ साथ एक खूबसूरत मिश्रित जंगल तैयार हो चुका है।
गंगा विचार मंच के प्रदेश संयोजक लोकेन्द्र सिंह बिष्ट की आज से 20 साल पहले शुरू की गई इस पहल व प्रयास से ग्रामीणों के सहयोग व वन विभाग उत्तरकाशी के सहयोग से इस जंगल मे आज 3 साल से लेकर 20 साल के बांझ के लगभग 5 हज़ार पेड़, 500 देवदार के पेड़, बुरांश व काफल, भमोर, गुरियाल, मोल, पैंया, किंगोड़, हिंसर, तिमली, तुन,मौवा, भंडर व दूसरी प्रजातियों के लगभग 10 हजार पौधों का एक मिश्रित जंगल लहलहा रहा है।
गौरतलब है कि विश्व पर्यावरण दिवस को मनाने की घोषणा संयुक्त राष्ट्र ने पर्यावरण के प्रति वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक जागृति लाने हेतु वर्ष 1972 में की थी। इसे 5 जून से 16 जून तक संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा आयोजित विश्व पर्यावरण सम्मेलन में चर्चा के बाद शुरू किया गया था। 5 जून 1974 को पहला विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया।

पर्यावरण को सुधारने हेतु यह दिवस महत्वपूर्ण है जिसमें पूरा विश्व रास्ते में खड़ी चुनौतियों को हल करने का रास्ता निकालता हैं. लोगों में पर्यावरण जागरूकता को जगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा संचालित विश्व पर्यावरण दिवस दुनिया का सबसे बड़ा वार्षिक आयोजन है। इसका मुख्य उद्देश्य हमारी प्रकृति की रक्षा के लिए जागरूकता बढ़ाना और दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे विभिन्न पर्यावरणीय मुद्दों को देखना है।

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