देश आजाद होने के 74 साल बाद भी गांव तक नही पहुंची सड़क, ग्रामीण परेशान।

टिहरी : जौनपुर विकासखण्ड की नैनबाग तहसील का एक गांव ऐसा है जहां पर जाने के लिये कोई भी सौ बार सोच विचार करने के बाद ही जाता है और दुबारा वहां नहीं जाने की कसम खाकर ही वापिस आता है। और यह गांव है दिल्ली-यमुनोत्री नेशनल हाइवे 507 के अगलाड़ पुल व खरसोन क्यारी के मध्य सिलासू नामक स्थान से लगभग तीन किमी ऊपर खतरनाक खाई के ऊपर बसा हुआ मेलगढ गांव है।
जौनपुर विकासखंड का मेलगढ़ गांव जहाँ पर आज भी देश आजाद होने के 74 साल बाद भी सरकार सड़क नहीं पहुँचा पायी है और सरकार के दावे हैं कि प्रदेश के सभी गांव सड़क से जोड़े गये हैं। गांव के आधे से अधिक परिवार पलायन कर विकासनगर आदि स्थानों पर जा चुके हैं और जो लोग अभी भी गांव में रह रहे हैं वह गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं। शायद मेलगढ गांव की भौगोलिक स्थिति जौनपुर विकासखण्ड के सभी गांवों में सबसे कठिन है। मेलगढ के ठीक ऊपर लगभग पांच किमी दूर काण्डी गांव बसा है, सात किमी दूर उत्तर में खरसोन व खरक गांव हैं जिसके बीच में घना जंगल है तथा पगडंडी मार्ग पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। सिलासू से मेलगढ तक इतनी खड़ी चढाई है कि सिलासू से मेलगढ जाने में आदमी द्वारा खाया पिया सब का सब निकल जाता है। रात को अगर किसी बीमार को सिलासू तक लाना पड़े तो हर समय जान का खतरा बना रहता है। मेलगढ गांव के राकेश सिंह तोमर का कहना है कि ग्रामीण पिछले तीन दशकों से सरकार के सभी नुमाइंदोें को दर्जनों बार गांव को सड़क मार्ग से जोड़ने की गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। 2019 के लोकसभा चुनावों से पूर्व ग्रामीणों ने खरक गांव वासियों के साथ मतदान नहीं करने का निर्णय लिया था लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा समस्या के समाधान का आश्वासन दिये जाने के बाद ग्रामीण मतदान करने को राजी हो गये थे। दो साल बीतने के बावजूद आज तक कोई प्रशासनिक अधिकारी या गांव नहीं आया। नेताओं पर अब ग्रामीणों का विश्वास उठ चुका है। ग्रामीण बचन सिंह तोमर, सतपाल तोमर, बलबीर सिंह तोमर, नैनसिंह, बलबीर बर्मा, संदीप तोमर आदि ने बताया कि अगर अभी भी सरकार ने गांव को सड़क मार्ग से जोड़ने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान नहीं की तो आने वाले विधानसभा चुनावों का पूरी तरह से बहिष्कार किया जाएगा जिसका अठज्यूला उपपट्टी के अन्य सात गांव भी समर्थन कर रहे हैँ। राकेश सिंह तोमर व बचन सिंह तोमर ने बताया कि चार-पांच साल पहले लोनिवि द्वारा सिलासू से मेलगढ तक सड़क मार्ग के लिये सर्वे किया गया था लेकिन उसके बाद गहरी निद्रा में चला गया।

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