भारत सरकार की डी.बी.टी. योजना का उत्तराखंड में नहीं हो रहा अनुपालन।

 -डा० राजेंद्र कुकसाल
उत्तराखंड : भारत सरकार के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्रालय ने अपने पत्रांक कृषि भवन,नई दिल्ली दिनांक फरबरी,28 2017 के द्वारा कृषि विभाग की योजनाओं में कृषकों को मिलने वाला अनुदान डी. वी. टी. के अन्तर्गत सीधे कृषकों के खाते में डालने के निर्देश सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के कृषि उत्पादन आयुक्त, मुख्य सचिव, सचिव एवं निदेशक कृषि को किये गये।
उत्तराखंड में कृषकों को योजनाओं में मिलने वाले अनुदान का डी०बी०टी० के माध्यम से   भुगतान सम्बन्धित भारत सरकार के आदेशों का  नहीं हो रहा अनुपालन।
क्या है डी ०बी ०टी० योजना –
डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) डी बी टी,  केंद्र सरकार द्वारा  शुरू की गई, इस योजना के माध्यम से सरकार द्वारा योजनाओं में प्रदान की जाने वाले सब्सिडी (अनुदान)का लाभ , चेक जारी करने, नकद भुगतान या सेवाओं अथवा वस्तुओं पर कीमत छूट प्रदान करने की बजाय सीधे लाभार्थी के खाते में स्थानांतरित यानी जमा  किया जाता है। इसके जरिए लाभार्थियों और जरूरतमंदों के बैंक खातों में सीधे रुपए डाले जाते हैं।
कुल मिलाकर भारत सरकार का एक ऐसा पेमेंट सिस्टम जिसके तहत लोगों के बैंक खातों में सीधे सब्सिडी डाली जाती है।
डीबीटी के माध्यम से योजना का सीधा लाभ योजना से जुड़े लाभार्थी को होता है। DBT योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें किसी तरह के धोखाधड़ी की कोई गुंजाईश नहीं रहती है। क्योंकि यहां लाभार्थी के खाते में सरकार सीधे तौर पर पैसे ट्रांसफर करती है । इस प्रकार सरकारी योजना का पूरा फायदा लाभा​र्थी को मिल जाता है। डी बी टी से जहां एक तरफ नकद राशि सीधे लाभार्थी के खाते में जाती है वहीं गड़बड़ियों पर अंकुश लगता है और दक्षता बढ़ती है।
कृषि एवं बागवानी विकास से इस पहाड़ी राज्य का आर्थिक विकास सम्भव है। भारत सरकार एवं राज्य सरकार की हजारों करोड़ की कई योजनाएं इस पहाड़ी राज्य के कृषकों के आर्थिक विकास हेतु संचालित हो रही है जिनपर भारत सरकार व राज्य सरकार कृषकों निवेश ( बीज,दवा खाद आदि) क्रय करने हेतु अनुदान देती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी सपना है कि भारत सरकार से दी गई अनुदान की राशि (DBT) के माध्यम से सीधे कृषकों के खाते में जमा हो।
उत्तरप्रदेश, हिमाचल आदि सभी राज्यों में बर्ष 2017 से ही कृषकों को योजनाओं में मिलने वाला अनुदान  डी बी टी के माध्यम से सीधे कृषकों के खाते में जा रहा है। इन राज्यों में पंजीकृत/चयनित कृषक  भारत सरकार/राज्य सरकार के संस्थानो /पंजीकृत बीज विक्रेताओं जो कृषि विभाग से पंजीकृत हों से स्वेच्छानुसार एम आर पी से अनधिक दरों पर नगद मूल्य पर क्रय कर क्रय रसीद सम्बंधित विभाग से भुगतान प्राप्त करने हेतु उपलब्ध कराई जाती है सत्यापन के बाद धनराशि कृषकों के बैंक खातों में विभाग द्वारा डाल दी जाती है।
उत्तराखंड में  बीज दवा खाद आदि निवेश आपूर्ति करने वाले एजेंटों ने निदेशालय एवं शासन में बैठे नौकरशाहों से मिल कर इस योजना को राज्य में अभी तक लागू नहीं होने दिया।
राज्य में 8.38  लाख कृषकों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि प्रति बर्ष 06 हजार रुपए की धनराशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से प्रदान की जा रही है। किन्तु अन्य योजनाओं में उत्तराखंड राज्य में ऐसा नहीं हो रहा है।
कृषि एवं उद्यान विभाग टेंडर प्रक्रिया दिखा कर योजनाओं में निम्न स्तर के निवेश (सामान) उच्च दरों पर क्रय कर कृषकों को मुफ्त में/ या कम दरों पर बांटते  है। इससे कृषकों की आय तो दुगनी होने से रही “हां ” नौकशाह व   निवेश आपूर्ति क्रताऔ की आय कई गुना बढ़ रही है।
अन्य राज्यों की तरह कृषकों को योजनाओं में स्वयं अपनी इच्छा अनुसार उच्च गुणवत्ता के निवेश (दवा बीज खाद आदि) क्रय करने की अनुमति होनी चाहिए तथा मिलने वाला अनुदान  डी बी टी के माध्यम से सीधे कृषकों के खाते में जमा होना चाहिए तभी कृषकों को योजनाओं का लाभ मिल सकता है।
इस दिशा में प्रयास हेतु , राज्य के किसानों को ही आगे आना होगा तथा अपनी न्यायोचित मांग सरकार के सामने रखनी होगी।
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