अधिकारी आंकड़ों की बाजीगरी के बजाए फिल्ड में दिखाएं काम, 5 साल में दोगुना करना है औद्यानिकी उत्पादन – कृषि मंत्री गणेश जोशी

देहरादून : बजट की ही तर्ज पर अब कृषि और उद्यान विभाग की आगामी 5 साल की कार्यवाहियों तथा लक्ष्यों के निर्धारण के लिए सूबे के कृषि मंत्री स्वयं राज्य के किसानों तथा फिल्ड पर काम कर रहे अधिकारियों/कर्मचारियों से ले रहे हैं। इसी क्रम में आज कृषि मंत्री गणेश जोशी ने उद्यान निदेशालय से राज्य के सभी 13 जनपदों में फिल्ड पर किसानों से सीधा सम्पर्क रखने वाले मुख्य उद्यान अधिकारियों(सीएचओ), जिला उद्यान अधिकारियों(डीएचओ) तथा जिला कृषि अधिकारियों(सीएओ) से वर्चुअल माध्यम से संवाद किया। कृषि मंत्री कृषि तथा उद्यान विभाग के लिए आगामी 5 सालों का रोडमैप तैयार करने के लिए वीजन डाक्युमेंट तैयार करवा रहे हैं। अगली कड़ी में कृषि मंत्री राज्य के समस्त 95 ब्लॉक से एक कृषि तथा एक उद्यान गतिविधियों में लगे किसानों सीधा संवाद कर वीजन डाक्यूमेंट हेतु उनके सुझाव लेंगे।
‘‘अभी विभाग संभाले 100 दिन भी पूरे नहीं हुए हैं। फिर भी मैं काफी कुछ समझने लगा हूं। इस दौरान मेरा पहला फोकस विभागों के कार्यशैली को बदलने का रहा है। मैं प्रयास कर रहा हूं कि पलायन रोकने में बेहद कारगर साबित हो सकने वाले कृषि तथा उद्यान जैसे महत्वपूर्ण महकमों की आगामी कार्ययोजना राजधानी देहरादून में बैठे अधिकारियों के बजाए फिल्ड पर किसानों से सीधे तौर पर जुड़ने वाले अधिकारियों तथा स्वयं किसानों की राय से तैयार की जाए। इसलिए मैं स्वयं फिल्ड अधिकारियों तथा किसानों से बात कर उनकी राय / सुझाव एकत्र कर रहा हूं। विजन डाक्युमेंट को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के 100 दिन पूरे होने पर जारी करेंगे। ’’ यह कहना है सूबे के कृषि मंत्री गणेश जोशी का।

*कुछ यूं की कृषि मंत्री ने फील्ड अधिकारियों से बात* –

राज्य के सभी सीएचओ, डीएचओ तथा सीएओ से वर्चुअल माध्यम से सीधा सवाल करते हुए कृषि मंत्री ने पहला सवाल ही यह पूछा कि ध्यान है कि पिछली बैठक कब हुई थी और उसमें क्या टारगेट आपको दिए गए थे?
फिर खुद ही बताने लगे कि पिछली बैठक तकरीबन ढ़ाई महीने पहले 8 अप्रैल को हुई थी। जिसमें आपको ग्राम स्तर पर माईक्रो लेवल प्लानिंग करने और लाभार्थी किसानों का पूरा पता मोबाईल नम्बर सहित उपलब्ध करवाने के लिए कहा गया था।
मंत्री द्वारा इतनी पिन-प्वाइंटेड सूचना मांगे जाने की उम्मीद शायद अधिकारियों को नहीं थीं। सकपकाए से अधिकारियों को सख्ती से हिदायत देते और कभी परिवार के गार्जियन की तरह समझाते मंत्री के सख्त और सधे हुए रूख ने फिल्ड अधिकारियों को सीधा संदेश दिया।
इसके बाद जनपद को आवंटित बजट को खर्च करने की स्थिति, ड्रिप सिंचाई, पॉलिहाउस, यंत्रीकरण, बीज तथा अन्य प्रकार के इनपुट जो कृषि तथा बागवानी के लिए दिए जाते हैं की सप्लाई करने वाली कम्पनियों, सामान की गुणवत्ता पर भी सीधी जानकारी ली।
यह भी पूछा कि आपके क्षेत्र में किन-किन फसलों में कितना – कितना क्षेत्रफल बढ़ाया गया है? किसानों को प्रशिक्षण के लिए कितने कैम्प लगाए गए? कितने प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए?
निर्देशित किया कि सभी जानकारियों को लिखित में एक सप्ताह के अंदर उपलब्ध करवाएं। साथ ही यह भी पूछा कि फिल्ड स्तर के अनुभव के आधार पर बताएं कि विजन डाक्युमेंट में क्या कुछ लिया जाना चाहिए।
कृषि मंत्री ने कहा कि हम औद्यानिकी और कृषि को राज्य से पलायन रोकने के सबसे कारगर टूल के तौर पर प्रयोग करना चाहते हैं। आगामी 5 सालों मेंं फसल उत्पादन को कम से कम दोगुना करने के प्राथमिक लक्ष्य के साथ हम चल रहे हैं। साथ ही यह भी प्रयास है कि हमारे अधिकारी और विशेषज्ञगण किसानों को उनके खेतों में जा कर सहयोग करें ना कि किसानों को अधिकारियों के दफ्तर के चक्कर काटने पड़े। आंकड़ों में दिखने वाली सुन्दर तस्वीर के बजाए मैं स्वयं विभगीय सचिव और अन्य अधिकारियों संग ग्राउण्ड में जा कर देखुंगा।
इस दौरान कृषि सचिव शैलेश बगौली, निदेशक कृषि गौरीशंकर, निदेशक उद्यान एचएस बावेजा तथा कृषि एवं उद्यान विभाग के अधिकारीगणों के साथ ही चमोली के सीएचओ, तेजपाल, उत्तरकाशी के सीएचओ रजनीश, रुद्रप्रयाग के डीएचओ, योगेन्द्र सिंह, पौड़ी के डीएचओ बीके तिवारी, टिहरी की सीएओ अभिलाषा, देहरादून की डीएचओ मीनाक्षी जोशी, हरिद्वार के नरेन्द्र कुमार, बागेश्वर से रामकिशोर सिंह, चम्पावत से टीएन पाण्डे, पिथौरागढ़ से रितू टम्टा, रूद्रप्रयाग से दीपक पुरोहित तथा उधमसिंह नगर से आरपी भट्ट तथा अन्य जनपदों के अधिकारी वर्चुअली जुड़े।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सोशल मीडिया वायरल