उद्यान की ही तरह रेशम उत्पादन के लिए राज्य में असीम संभावनाएं – कृषि मंत्री जोशी

देहरादून : कृषि मंत्री गणेश जोशी द्वारा आज पटेलनगर स्थित एक होटल में ‘‘सिल्क समग्र -2’’ विषय पर आयोजित कार्याशाला में रेशम बोर्ड के अधिकारियों, कर्मचारियों तथा केन्द्रीय रेशम बोर्ड के प्रतिनिधियों को संबोधित किया। कृषि मंत्री द्वारा सिल्क उत्पादों के प्रदर्शनी स्टॉल का भी अवलोकन किया।
अपने संबोधन में कृषि मंत्री ने कहा कि यह अति प्रसन्नता का विषय है कि आज हमारे प्रदेश में केन्द्रीय रेशम बोर्ड (भारत सरकार) की सहायता से आगामी पांच वर्षों के लिए संचालित की जाने वाली रोजगारोन्मुखी ‘‘सिल्क समग्र-2‘‘ योजना को सैद्धांतिक स्वीकृति मिल गई है। इस योजना के तहत प्रदेश के कृषकों को रेशम क्लस्टरों के माध्यम से जोड़ते हुए लाभान्वित किया जाएगा। राज्य की पर्यावरणीय अनुकूलता तथा छोटी कृषि जोतों, पर्वतीय क्षेत्रों में उद्योगशून्यता के लिहाज से देखें तो रेशम उद्योग एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। सहायक कृषि पर आधारित यह योजना ग्रामीण आर्थिकी को सुदृढ करने व रोजगार के अवसर जुटाने के साथ ही पलायन रोकने में मददगार होगी।
रेशम उत्पादन का कार्य किसानों द्वारा अन्य गतिविधियों जैसे – कृषि, पशुपालन इत्यादि के साथ सुगमतापूर्वक किया जा सकता है। सिल्क समग्र -2 योजना के अन्तर्गत रेशम उद्योग के विभिन्न कार्यकलापों से जुड़ने वाले लाभार्थियों को नर्सरी, पौध रोपण, प्रशिक्षण से लेकर कोया बाजार व्यवस्था तक का प्राविधान किया गया है।

अधिकारियों को कहा कि आकड़ों के खेल से बचें

केन्द्रीय रेशम बोर्ड के अधिकारी बता रहे हैं कि राज्य को इस बार पिछली बार की तुलना में 3 गुना बजट दिया जा सकता है। बजट तो केन्द्र से आ जाएगा। पर उसका सही प्रयोग करना और उससे किसानों की आय में भौतिक तौर पर बृद्धि सुनिश्चित करवाना आपका काम है। इसे आंकड़ों के खेल में उलझाने के बजाए वास्तविकता में लाएं। राज्य में रेशम उद्योग के सर्वांगीण विकास एवं प्रसार की पूरी जिम्मेदारी आप सभी के कधों पर है। आप सभी अधिकारी/कर्मचारीगण अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करेंगे तो निश्चित तौर पर किसानों की आय भी बढ़ेगी और प्रदेश का भी भला होगा।
विभाग के मुखिया के तौर पर मैं अपनी ओर से आपको विश्वास दिलाता हूॅ कि विभाग एवं किसानों के हित के लिए जब भी मेरी आवश्यकता होगी मैं हर समय तत्पर हूॅ।

निदेशक रेशम बोर्ड आनंद कुमार यादव ने बताया कि उत्तराखण्ड राज्य रेशम उत्पादन में अब हिमाचल की बराबरी पर आ गया है। राज्य में सिल्क उत्पादन की शानदार संभावनाएं हैं। ऐसी उम्मीद है कि इस बार राज्य को 15-20 करोड़ तक बजट मिल जाए। हम चाहते हैं कि सिल्क समग्र – 2 के बाद उत्तराखण्ड रेशम उत्पादन में शीर्ष राज्यों में आए। अधिकांशतः हम देखते हैं कि किसान फसलों का उत्पादन तो कर लेता है लेकिन समुचित बाजार व्यवस्था न होने के कारण उसे अपनी मेहनत के अनुसार उचित दाम नहीं मिल पाता है। इस योजना का सबसे अच्छा पक्ष यह है कि इसमें बाजार व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी सहायता का प्रावधान किया गया है।
कार्यक्रम में केन्द्रीय रेशम बोर्ड के उप सचिव तकनीकी, आरके सिन्हा, उपनिदेशक गढ़वाल प्रदीप कुमार, सहायक निदेशक नरेश कुमार तथा सहायक निदेशक हेम चन्द्र आर्या एवं अन्य विभागीय कार्मिक भी उपस्थित रहे।

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