गैर बनाल साठी पांसाई थोक की टूटी देवलांग, अब मंगाई दुसरी देवलांग।

रिपोर्ट – अरविन्द थपलियाल

उत्तरकाशी : जिले के नौगांव विकासखडं में मंगसीर बग्वाल का त्योहार अपनी पौराणिक परपंरा के अनुसार मनाया जाता है।वहीं बनांल पट्टी के गैर गांव में हर वर्ष आयोजित होने वाले देवलांग महापर्व भी मनाया गाया तो इस दौरान देवलांग उठाते समय टुट गयी हांलाकि दो चार लोगों को हांलाकि कोई हतात नही हुआ।

यह मामला तब हुआ जब बनाल पट्टी के दोनो थोक बनाल पट्टी के देवलांग को उठा रहे थे । देवलांग मुख्यत: रामा सेराई एवम कमल सेराई के 52 से अधिक गांवों के सबसे बड़े राजकीय मेले देवलांग महापर्व को लेकर जनमानस में भारी उत्साह के साथ पंहुचे थे। विदित है कि क्षेत्र के आराध्य देव राजा रघुनाथ के गैर मंदिर प्रांगण में मंगसीर बग्वाल के दिन हर वर्ष देवलांग के दर्शनार्थ भारी संख्या में लोगो का हुजूम उमडा़ था।
उसके बाद रात्रीकाल में पौराणिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आगाज तांदी नृत्य के साथ हुआ।
सुबह 4बजे देवलांग को खडा़ किया गया था लेकिन देवलांग टूट जाने से दूसरी देवलांग लाई गयी और पौराणिक विधान से आग लगाई लगाई।
देवलांग पर आग लगाते समय बनाल क्षेत्र के दो थोक मुख्य हैं जिन्हे साठी और पनसाई कहा जाता है।
बतादें कि मंगसीर बग्वाल की सबसे पुरानी यह रस्म है जो उत्तरकाशी जिले के रवांई घाटी के बनाल क्षेत्र में मनाई जाती है।

यह देवलंग अब राजकीय देवलंग के नाम से प्रसिद्व है यहां दूरदराज के हजारों लोग रात्री में पंहुच जाते हैं।

रवांई घाटी में मंगसीर बग्वाल की सबसे लंबी मशाल गैर बनाल में जलाई जाती है जो सेकडो़ वर्ष से मनाई जाती है।

यहां लगभग सेकडो़ ढोल दमाऊ,रणसीगों,की धून के साथ देवलंग को उठाया जाता है और पुजा अर्जना करने के बाद आग लगाई जाती है।

देवलांग महापर्व पर बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए चक चौबंद व्यवस्था को बनाने हेतु बनाल पट्टी के दोनों तोको साठी-पांसाई के जनमानस युद्धस्तर पर हो रखा था।

देवलांग क्या है

देवलांग देवदार वृक्ष की एक बड़ी मशाल है जिसे महापर्व के दिन साठी- पांसाई तोको के लोग बियाली के जंगल से सुरक्षित रघुनाथ मन्दिर प्रांगण गैर बनाल में लाते हैं । तत्पश्चात साठी-पानशाही थोकों के लोग देवदार के विशालकाय वृक्ष पर लकड़ियां बांधते हैं व शुभ मुहर्त पर देवलांग को खड़ाकर आग लगाई जाती हैं । मंदिर प्रांगण में खड़ा करके उस पर आग जलाते हैं । अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक मेले को देखने को रवांई, जोनपुर जौनसार,बाबर समेत दूर-दूर से लोग भारी संख्या में आते हैं।
कार्यक्रम में पुरोला विधायक दुर्गेश्वर लाल सहित सेकडो़ गणमान्य भी पंहुचे थे।

देवलांग महापर्व रंवाई घाटी की समृद्धशाली परम्परा व सांस्कृति का प्रतीक है को उत्तराखंड सरकार ने राजकीय मेले का दर्जा दिया है।

रवांई घाटी की समृद्धि व विशालता की अनूठी परंपरा तथा संस्कृति को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने देवलांग मेले को राजकीय मेले का दर्जा दिया है।

देवलांग महापर्व को लेकर स्थानीय युवाओं में भी भारी उत्साह है । स्थानीय युवा आशीष उनियाल, बीडीसी सदस्य प्रेम सिंह चौहान व बरिष्ठ पत्रकार एवम रघुनाथ महाराज के पुजारी सच्चिदानंद नोटियाल ने बताया कि लोगो मे भारी उत्साह है व बाहर से लोगो का बनाल पट्टी के गांवों में आगमन हुआ है ।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सोशल मीडिया वायरल