सलमान खुर्शीद की पुस्तक सनराईज ओवर अयोध्या में हिन्दुत्व की तुलना कुख्यात इस्लामिक आतंकवादी संगठनों जाने के जवाब में खुला पत्र।

मसूरी : शहर के सामाजिक कार्यकर्ता एडवोकेट रमेश कुमार जायसवाल ने अधिवक्ता, उच्चतम न्यायालय एवं नेता / प्रवक्ता कांग्रेस पार्टी सलमान खुर्शीद को एक खुला पत्र लिखा है जिसमे उन्होंने कहा है कि –

“श्रीमान सलमान खुर्शीद, वरिष्ठ अधिवक्ता, उच्चतम न्यायालय एवं नेता / प्रवक्ता कांग्रेस पार्टी द्वारा अपनी पुस्तक सनराईज ओवर अयोध्या में हिन्दुत्व की तुलना कुख्यात इस्लामिक आतंकवादी संगठनों आईएसआईएस व बोको हराम से किये जाने के जवाब में खुला पत्र।
अभी हाल ही में कांग्रेस के नामचीन नेता व प्रवक्ता तथा उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीमान सलमान खुर्शीद साहब ने अपनी लिखी हुई पुस्तक सनराईज ओवर अयोध्या का विमोचन दिल्ली के एक आलीशान होटल में तथाकथित अंग्रेजी / वामपन्थी प्रजाति के दिखावटी बुद्धिजीवियों की मौजूदगी में बड़ी शान किया। अपनी इस पुस्तक में सलमान खुर्शीद महाशय ने बड़ी बेशर्मी एवं निहायत व बेवकूफान तरीके से हिन्दुत्व की तुलना कुख्यात इस्लामिक बचकाने व आतंकवादी संगठनों आईएसआईएस व बोको हराम से करते हिन्दुत्व की विचारधारा को इन हुए कुख्यात इस्लामिक आतंकवादी संगठनों के समान ही खतरनाक बताया है। श्रीमान सलमान साहब, यदि हिन्दुत्व की विचारधारा आईएसआईएस व बोको हराम जैसी खतरनाक होती तो हिन्दुत्व के बारे मे अपने उपरोक्त नेक ख्याल जग-जाहिर करने के बाद आप कभी के अल्लाह को प्यारे होकर जन्नत मे 72 हूरों के साथ रंगरेलियां मनाते पाये जाते और नीचे हिन्दुस्थान मे आपके परिवार व सम्पत्तियों को उन आतंकवादी हिन्दुओं ने कभी अग्नि में स्वाहा कर दिया होता।
श्रीमान सलमान खुर्शीद साहब भारतवर्ष मे जन्म पाकर व पूरा जीवन यहां की हवा-पानी अन्न का सेवन कर जीवित होने के बावजूद आप अभी तक भी यह बात नहीं समझ सके हैं कि हिन्दुत्व वसुधैव कुटुम्बकम एवं अहिंसा परमो धर्म को मानने तथा इनका पालन करने वाली विचारधारा है। यह इसी बात से सिद्ध भी हो जाता है कि हिन्दुत्व की इतनी बडी आलोचना व बुराई करने के बाद भी भारत मे आप, आपका परिवार तथा आपकी सारी सम्पत्ति अभी तक सुरक्षित है और आगे भी सुरक्षित ही रहेंगी। क्योंकि यह आप भी अपने अन्तरमन में अच्छी तरह से जानते व मानते हैं कि हिन्दुत्व कहीं से भी आतंकवादी तो क्या अशान्तिप्रिय बदला लेने वाली विचारधारा है ही नही। जो अपनी जरा सी आलोचना से बिलबिला कर आलोचना करने वाले पर किसी प्रकार हमलावर हो जाये अथवा रक्तपात करने पर उतारू हो जाये। लेकिन आप अपने पूरे जीवन में कभी भी आईएसआईएस व बोको हराम के किसी जघन्यतम कारनामे की आलोचना तो क्या उसकी निन्दा करने का साहस करना तो दूर, ऐसा करने के लिए सोचने का साहस भी नहीं जुटा पायेंगे क्योंकि आप भली भान्ति जानते है कि ऐसा करने का अन्जाम पूरे परिवार सहित मौत एकदम तय हो जायेगी।
श्रीमान सलमान खुर्शीद साहब वस्तुतः भारतवर्ष में जन्म लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति पहले भारतीय है और सभी भारतीयों का गुणसूत्र (डीएनए ) एक समान ही होता है, फिर चाहे वह हिन्दुत्व का पालन करता हो अथवा इस्लाम या ईसाईयत का अनुशरण करने लगा हो, क्योंकि हम सभी भारतीय एक समान पूर्वजों की ही सन्ताने हैं। हिन्दुस्थान मे रहनेवाले सभी ईसाई व मुसलमान हम हिन्दुओं के भाई ही हैं क्योंकि हम सभी के पूर्वज एक समान भाई ही थे। हममे से ही कुछ लोगों ने कभी चन्द पैसों के लालच में अथवा तत्कालीन मुस्लिम शासन-व्यवस्था में किसी पद या सुविधाओं के लालच में फंसकर इस्लाम स्वीकार कर लिया था तथा कुछ लोगो ने बाद में ब्रिटिश उपनिवेशिक काल में ईसाई मिशनरियों के दुष्चक्र में फंसकर ईसाईयत को स्वीकार कर लिया।
परन्तु श्रीमानजी इससे उनका मूल गुणसूत्र तो नहीं बदल सकता था ना, वह सभी केवल मानसिक व वैचारिक रूप से ही धर्मान्तरित होकर आज भी मुस्लिम या ईसाई बने हुए है, वास्तविकता मे तो यह सभी आज भी मूलतः सनातनी भारतीय (हिन्दू) ही है क्योंकि उन सभी का आपका व मेरा हम सभी का गुणसूत्र (डीएनए ) एक समान ही मूलतः सनातनी भारतीय (हिन्दू) ही है। ठीक उसी प्रकार, जिस प्रकार आप उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ वकील है और मैं एक जिला न्यायालय का छोटा वकील, लेकिन हैं तो हम दोनो ही वकील और (प्रोफेशनल ब्रदर्स ) हम पेशा भाई आप तो बडी बडी किताबें लिखते हैं और मैं कभी-कभार ही छोटे-छोटे आर्टिकल लिख लेता हूं, लेकिन काम तो हम दोनों को एक जैसा ही है ना, इस तरीके से भी हम दोनों आपस में लेखक बंधु तो हुए ना।
आदरणीय बडे भाई सलमान खुर्शीद साहब, निःसंदेह ही आप किसी गहरे मतिभ्रम के शिकार हो रखे हैं। संभवतः आपको अपने दो या चार पीढी से ज्यादा पहले के पूर्वजों के नाम मालूम नही होंगे। आपकी जानकारी के लिए यह भी बताना जरूरी है कि मुगल सल्तनत काल मे वर्ष 1660-75 के दौरान बादशाह औरंगजेब ने शाही फरमान जारी करवाकर एक हिन्दु पुरूष को इस्लाम में धर्मान्तरित करवाने पर चार आना तथा एक हिन्दु महिला को इस्लाम में लाने पर दो आना ईनाम घोषित किया था तथा इस काम के लिए बहुत से मुल्ला-मौलवियों के साथ-साथ एक बड़ी तादाद में सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों की नियुक्ति की थी जिसके फलस्वरूप लाखों की संख्या में गरीब-कमजोर हिन्दुओं को जर्बदस्ती व डरा-धमकाकर मुसलमान बनवा दिया गया था।
श्रीमानजी, यदि आप पूरी ईमानदारी से अपनी 10-12 पीढी पीछे तक के पूर्वजों का पता कर लें तो आपको मालूम हो जायेगा कि किन-किन हिन्दु आतंकवादियों का खून आज भी आपकी नसों मे दौड़ रहा है। यदि आप ईमानदारी से अपनी पुरानी पीढियों की जानकारी हासिल करेंगे तो आपको यह भी पता चलेगा कि आपका कौन-कौन पूर्वज कितने आने में बिक कर अथवा किस प्रकार डर से भयभीत होकर या किस पद-प्रतिष्ठा के लालच में फंसकर सबसे पहले मुसलमान बने थे। यदि आपके वो पूर्वज सचमुच आतंकवादी या बहादुर और सच्चे होते तो यकीनन आज आप मुसलमान ही नहीं होते। इस प्रकार खोजबीन करने से आपकी हिन्दुत्व के बारे में सभी शंकाओं का समाधान भी स्वतः ही हो जायेगा। आशा है कि आप इस दिशा में एक प्रयास अवश्य करेंगे जिससे आपको आपकी ही सही वास्तविकता का पता चल सकेगा तथा आप किसी उल-जलूल – बेतुकी बचकानी हरकतों को दोहराने से बच पायेंगें, साथ ही हिन्दुत्व के बारे मे आपके मतिभ्रम का भी सही व पूरा उपचार हो सकेगा। यह भी संभव है कि ऐसा सच्चा व सार्थक प्रयास करने पर व अपनी पूरी व सही वास्तविकता पता चलने पर शायद आपको अपनी पुस्तक में हिन्दुत्व के बारे में लिखी बातो पर अफसोस व पछतावा होने लगेगा। इसके बाद आप स्वयं ही उक्त पुस्तक में वसुधैव कुटुम्बकम एवं अहिंसा परमो धर्म को मानने तथा इनका पालन व इनके अनुरूप आचरण व व्यवहार करने वाली हिन्दुत्व की विचारधारा की तुलना कुख्यात इस्लामिक आतंकवादी संगठनों आईएसआईएस व बोको हराम से करने पर क्षमा मांगते हुए इसका खण्डन करने तथा अपनी इस पुस्तक को मार्केट से वापस मंगवाने पर भी विचार कर सकते है। परमपिता परमात्मा से प्रार्थना है कि वह आपको ऐसा प्रयास करने का साहस व सदबुद्धि प्रदान करें।
आपका हमपेशा छोटा भाई व शुभाकांक्षी।
रमेश कुमार जायसवाल, एडवाकेट, मसूरी, देहरादून, उत्तराखण्ड।”

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