टिहरी – सड़क का अभाव, देर रात पांच किलोमीटर पैदल चलकर अस्पताल पहुंची प्रसव पीड़ा से तड़पती हुई महिला।

रिपोर्ट – देवेन्द्र बेलवाल

टिहरी/धनोल्टी : लग्गा गोठ निवासी सोनू गौड़ की धर्मपत्नी अंजू देवी 22 जून रात को प्रसव पीड़ा होने पर रोड न होने के कारण पैदल ही रात्रि के करीब 11:00 बजे धनोल्टी लग्गा गोठ से पैदल जंगल के बीचो बीच से उबड़ खाबड़ रास्ते होते हुए निकले व धनोल्टी पहुंचते-पहुंचते 5 घंटे का समय लग गया।

रोड ना होने के कारण सोनू गौड़ अपनी धर्म पत्नी अंजू देवी को सुनसान उबड़ खाबड़ जंगल के रस्ते से होते हुए रात्रि में 4:00 बजे सुबह धनोल्टी पहुंचे व उसके पश्चात प्राइवेट वाहन से मसूरी अस्पताल पहुंचाया जहां पर पहुंचते ही उनका प्रसव हो गया और उन्होंने बेटे को जन्म दिया।

सोनू गौड़ ने अपनी पीड़ा को रात्रि में वीडियो के माध्यम से समस्त जनप्रतिनिधियों अधिकारियों शासन में बैठे लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया, कि वह आजादी के बाद भी गुलामी की राह झेल रहे हैं व रोड न होने के कारण आज बहुत बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है पूर्व में भी धनोल्टी लगा गोठ क्षेत्र में कई लोगों ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया वो रोड़ न होने से व अस्पताल समय पर न पहुंचने के कारण जिंदगी से हाथ भी धोना पड़ा है, पूर्व में विशाल मणि चमोली के पुत्र के पहाड़ी से गिरने पर व गांव के निवासी चिरंजीलाल, सीताराम चमोली, सोहनलाल की लड़की, चंद्रमोहन चमोली के दो लड़के, छंछरू दास के लड़के सहित कई ऐसे उदाहरण है जिनको समय पर अस्पताल न पहुंच पाने के कारण रास्ते में अपनी जिंदगी गवांनी पड़ी।

 

धनोल्टी लग्गा गोठ राजस्व ग्राम क्षेत्र के अंतर्गत चूलीसैंण चोरगढ़ झालकी पिरियांणा आदि तोकों में लगभग ढाई सौ से अधिक लोग निवासरत है जिनकी सभी की जीविका कृषि पर आधारित है व रोड़ न होने के कारण किसानों की फसलें खेतों से मंडी तक पहुंचने में हजारों रुपए खच्चरों के भाड़े रूप में लग जाते हैं वे कई बार फसलें खेतों में ही सड़ जाती हैं। व किसानों के हाथ कुछ भी नहीं लगता ऐसे में उनकी जीविका चलना बड़ा मुश्किल हो जाता है सरकार खेती किसानी के हित में खूब बड़ी-बड़ी बातें करती हैं किंतु खेतों से उगने वाली फसलें कैसे बिना रोड़ के मण्डी तक पहुंचे उस विषय पर नहीं सोचती कैसे उस गांव के लोगों का आना जाना होगा बिना रोड़ के उनकी दिनचर्या उनके स्वास्थ्य सुविधाएं व अन्य चीजें कैसे होंगी इस विषय पर कभी नहीं सोचा। इसी के साथ ही यहीं पर धनोल्टी राजकीय इंटर कॉलेज भी है जहां पर आसपास के 10 गांव के बच्चे अध्यापक पठन-पाठन के लिए आते हैं किंतु रोड के अभाव में बच्चों के पठन-पाठन पर भी प्रभाव पड़ता है और रास्ता भी बिल्कुल उबड़-खाबड़ व चलने लायक भी नहीं है यह विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी धनोल्टी के नजदीक लगा हुआ क्षेत्र है जहां पर उच्च अधिकारी गणों का राजनेतागणों का का आना जाना लगा रहता है किंतु किसी के द्वारा भी इस संबंध में कुछ नहीं किया गया इस संबंध में सरकार से बार-बार गुजारिश की गई कि हमारे धनोल्टी लग्गा गोठ क्षेत्र को रोड से जोड़ा जाए किंतु सरकार हर जगह विकास की बातें करती है परंतु आजादी के बाद भी आज से इस क्षेत्र में रोड़ न पहुंच पाना सरकार की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगाता है पूर्व में वर्तमान में स्थानीय ग्रामीणों के द्वारा अपने जनप्रतिनिधि के माध्यम से व स्वयं के द्वारा भी शासन प्रशासन को अपनी मात्र 2 से 3 किलोमीटर रोड की स्वीकृति हेतु गुजारिश की गई थी किंतु सरकार में बैठे लोगों द्वारा स्थानीय लोगों की परेशानियों को अनसुना कर दिया जाता है जिसका खामियाजा यहां की गांव की भोली भाली जनता को पैदल चलकर व समय पर स्वस्थ उपचार न मिलने के कारण जान गंवाने के रूप में मिलता है एक बार फिर से उत्तराखंड सरकार शासन प्रशासन से अनुरोध किया जाता है कि भविष्य में कोई अनहोनी घटना घटित न हो और गांव की जनता के हित में रोड सुविधा से जोड़ा जाए इस वीडियो को अधिक से अधिक शेयर कर अपनी इस समस्या को शासन में बैठे लोगों तक पहुंचाने में अपना सहयोग करें

सोनू गौड़ की पीड़ा को समझकर लिखने का मन किया व भविष्य में भी कई ऐसे भाई बहन बुजुर्गों को भी ऐसा दर्द रोड़ के अभाव में सहना पड़ेगा इसलिए सभी अपने अधिकारों व रोड़ के लिए एकजुट होकर आवाज उठायें संगठन में ही शक्ति है।

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