100 दिनों के कार्यों की प्रगति की भी हुई पड़ताल, मंत्री गणेश जोशी ने कहा परफॉरमेंस ही है अंतिम विकल्प।

देहरादून : कृषि एवं ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने अपने शिविर कार्यालय में उद्यान विभाग के अधिकारियों संग राज्य के औद्यानिकी विकास की आगामी दो वर्ष की कार्ययोजना की गहन पड़ताल की। लगभग दो घंटे तक चली प्रस्तुतिकरण आधारिक इस मैराथन समीक्षा बैठक में लाभार्थियों को राजसहायता वितरण करने के लिए डीबीटी प्रणाली अपनाए जाने, सेब के उत्पादन को आगामी 5 वर्षों में 10 तक बढ़ाने, अखरोट तथा कीवी को बढ़ावा देने, औषधीय तथा सगंध पौधों की खेती को बढ़ावा देने तथा उद्यानिकी क्षेत्र से संबंधित शोध कार्यों को सीधे किसानों से जोड़े जाने तथा अन्य बिन्दुओं पर चर्चा की गई।
कृषि मंत्री द्वारा विभिन्न विभागों द्वारा दिए गए प्रस्तुतिकरण पर विस्तृत चर्चा के उपरांत निर्देशित किया कि समस्त विभाग आगामी 5 वर्षों के लिए एक्शन एवं विजन डाक्युमेंट तैयार करें।
उद्यान विभाग को निर्दशित किया गया कि आगामी 5 वर्ष में औद्यानिकी के समग्र विकास हेतु विस्तृत वीजन डाक्युमेंट तैयार किया जाए। राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों, कृषि जलवायु एवं बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए प्रथम चरण में फल / सब्जी की क्लस्टर आधारित दो फसलां के उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु कार्ययोजना तैयार की जाए। जिसमें फसल विशेष के संर्वागीण विकास हेतु पौधरोपण सामाग्री उत्पादन, तुड़ाई उपरांत प्रबंधन, विपणन एवं प्रसंस्करण इत्यादि से संबंधित समस्त गतिविधियों का समावेश किया जाए। राज्य में मौन पालन को बढ़ावा देने हेतु चम्पावत व देहरादून में एकीकृत इकाई स्थापना का प्रस्ताव तैयार किया जाए। कास्तकारों को विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पादर्शिता पूर्ण रूप से लाभांवित करने हेतु डीबीटी अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
कृषि फसलों को बढ़ावा देने हेतु 5 वर्षीय वीजन डाक्युमेंट तैयार किया जाए। किसानों की समस्याओं के समाधान तथा उनसे जीवंत संवाद स्थापित किए जोन हेतु कॉल सेंटर स्थापित किया जाए।
सगंध पादपों के अंतर्गत तेजपत्ता उत्पादन के सर्वांगीण विकास हेतु राजकीय उद्यान खतेड़ा, चम्पावत में उत्कृष्टता केन्द्र की स्थापना की जाए। जिसके माध्यम से राज्य में लगभग 2500 हेक्टेअर तेजपत्ता एवं दालचीनी उत्पादन को लक्ष्य निर्धारित किया जाए।
जैविक उत्पादों को बढ़ावा देने हेतु आगामी वर्षों में उत्पादन कार्यक्रम व विक्रय किए जाने वाले उत्पादों की लागत को रेखांकित करते हुए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए। जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाए कि कार्ययोजना के क्रियांवयन से कितने कास्तकार लाभांवित होंगे तथा उनकी आय में कितनी बृद्धि होगी।
इस दौरान सचिव कृषि शैलेश बगौली, निदेशक कृषि गौरीशंकर, निदेशक उद्यान हरमिंदर सिंह बवेजा, आलोक श्रीवास्तव, वरिष्ट सलाहकार जाईका प्रोजेक्ट, नपेन्द्र चौहान, निदेशक सगंध पादप केन्द्र, एके यादव, निदेशक रेशम, डॉ0 सुरेश राम, संयुक्त निदेशक उद्यान, विशेष आमंत्रित प्रतिभागियों के तौर पर उद्यानिकी किसान प्रतिनिधि सुधीर चड्डा, कृषि उत्पाद व्यवसायी श्रीकांत शर्मा भी उपस्थित रहे।

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