मसूरी – फूड फेस्टिवल में पर्यटक ले रहे हैं पहाड़ी व्यंजनों का स्वाद।

मसूरी : उत्तराखंड पर्यटन विभाग के तत्वाधान में शहर की माल रोड पर लगाये गये फूड फेस्टिवल में इस बार हर स्टाल पर पहाड़ी व्यंजन परोसे जा रहे हैं, जिसमें मसूरी घूमने आये हुए पर्यटक पहाड़ी व्यंजनों का जमकर आनंद ले रहे हैं व इसके लजीज स्वाद की सराहना कर रहे हैं।


शहर की माल रोड पर तीन दिवसीय फूड फेस्टिवल पर्यटन विभाग की ओर से पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए लगाया गया है। जिसमें लगभग सभी स्टालों पर पहाड़ी व्यंजन किसी न किसी रूप में परोसे जा रहे हैं वहीं पहाडी उत्पाद भी रखे गये हैं।

इस अवसर पर पालिका सभासद व देवभूमि उत्तराखंड सांस्कृतिक परिवार संस्था की अध्यक्ष गीता कुमाई ने कहा कि सरकार को इस प्रकार के आयोजन निरंतर करते रहने चाहिए जिससे पहाड़ी उत्पादों एवं व्यंजनों को देश-दुनिया मे पहचान मिल सके। उन्होंने बताया कि पर्यटक के साथ ही स्थानीय लोगों को भी पहाड़ी व्यंजनों को काफी पसंद कर रहे हैं।

इसी कड़ी में उडिपी रेस्टोरेंट जो साउथ इंडियन खाने के लिए मशहूर है उन्होंने पहली बार दक्षिण भारतीय व्यंजन उत्तराखंड के उत्पादों के साथ मिला कर बनाया है, जिसका स्वाद हर किसी खाने वाले पर्यटक को भा रहा है। स्टाल के संचालक विजय भार्गव ने बताया कि उन्होंने इस फूड फेस्टिवल में दक्षिण भारतीय व्यंजन उत्तराखंड के उत्पाद कोदा, झंगोरा के साथ मिला कर बनाया है। जिसमें कोदे का डोसा, व इडली लोगों को पहाड़ी चटनी के साथ बहुत ही लजीज स्वाद का आनंद दे रहा है वहीं जो रसम बनायी है उसमें भी गहथ की दाल व पहाड़ी मसालों का प्रयोग किया गया है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक पहल है शायद इससे पहले दक्षिण भारतीय व्यंजनों में कोदे व झंगोरे का प्रयोग नहीं किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि जो भी पर्यटक कोदे का डोसा व झंगोरे की इडली खा रहा है वह खाने के बाद उसकी रेसिपी के बारे में भी जानकारी ले रहा है जिसके बारे में उन्हें बताया जा रहा है कि यह उत्पाद पौष्टिक होने के साथ ही स्वास्थ्य के लिए बहुत ही उपयोगी है वहीं कई रोगों में भी लाभदायक है।

मसूरी होटल एसोसिएशन के सचिव अजय भार्गव ने बताया कि दक्षिण भारतीय व्यंजन में उत्तराखंड के उत्पादों का प्रयोग एक दम नया है इस फ्यूजन को हर कोई पर्यटक खाने के बाद सराह रहा है। इससे आने वाले समय में उत्तराखंड के व्यंजनों का खासा प्रचार देश विदेश में होगा व इसे नई पहचान मिलेगी। वहीं अन्य स्टालों पर उत्तराखंडी दाल के पकोडे, अर्से, रोटाना, कंडाली का सूप व कंडाली के कबाब, कोदे की रोटी, झंगोरे की खीर, कंडाली का साग, सरसों का साग व मक्के की रोटी सहित मांसाहारी खाना भी पसंद किया जा रहा है।

उत्तराखंड होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप साहनी ने कहा कि विंटर लाइन कार्निवाल में वर्ष 2013 से ही फूड फेस्टिवल आयोजित किया जा रहा है लेकिन गत दो वर्ष कोरोना के कारण फूड फेस्टिवल आयोजित नहीं किया गया और इस वर्ष भी अंतिम क्षणों में कार्निवाल स्थगित कर दिया गया लेकिन पर्यटन विभाग ने फूड फेस्टिवल का आयोजन कर सराहनीय कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि इससे उत्तराखंड के पर्यटन को नई दिशा मिली है इसी के तहत फूड फेस्टिवल में उत्तराखंड के फूड परोसे जा रहे हैं जिससे यहां के खानपान व उत्पादों को देश विदेश में प्रचार हो रहा है और पर्यटन को बढाने के लिए ऐसे इवेंट आयोजित किए जाने चाहिए।
फूड फेस्टिवल पर सरकारी कोरोना गाइड लाइन का असर पड़ रहा है। क्योंकि प्रदेश सरकार ने पूरे प्रदेश में नाइट कर्फ्यू लागू कर दिया है जिसके कारण पर्यटकों की आमद में कमी आ गई है। दिन भर फूड फेस्टिवल के स्टाल खाली नजर आ रहे है तथा शाम को थोड़ा बहुत पर्यटक मालरोड पर आ रहे है, लेकिन जो पर्यटक आ रहे है वह पहाड़ी व्यंजनों को खाकर यहां के खानपान की सराहना कर रहे हैं। वहीं विंटर लाइन कार्निवाल के स्थगित करने का भी असर साफ दिखाई दे रहा है।

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