हिमवंत कवि चंद्रकुंवर बर्त्वाल की पुण्यतिथि पर श्रद्वांजलि, साहित्याकाश के धु्रब तारा थे चंद्रकुंवर।

मसूरी : चंद्रकुंवर बर्त्वाल शोध संस्थान और द हिल्स ऑफ मसूरी के संयुक्त तत्वावधान में प्रकृति के चितेरे कवि चंद्रकुंवर बर्त्वाल की 75वीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्वांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि चंद्रकुंवर का हिंदी साहित्य में अभूतपूर्व योगदान रहा। महज 28 वर्ष की आयु में कवि ने हिमालय और प्रकृति के विभिन्न उपादानों पर सैकडों कविताएं हिंदी साहित्य को समर्पित कर काव्य का समृद्व किया है।
मालारोड स्थित हिमवंत चंद्रकुंवर बर्त्वाल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। इस मौके पर चंद्रकुंवर बर्त्वाल शोध संस्थान के अध्यक्ष शूरवीर भंडारी ने कविवर की रचना संसार पर प्रकाश डाला। उन्हांेंने कहा कि कवि ने हिमालय के विराट स्वरूप, हिमनद, झरने और नदियों समेत प्रकृति तमाम उपादानों पर रचनाएं की। उनकी कविताओं पर कई शोधार्थियों ने शोध किया। और उच्च शैक्षणिक संस्थानों में उनकी कविताएं पाठृयक्रम में शामिल की गई।

पालिकाध्यक्ष अनुज गुप्ता ने कहा कि कविवर की अप्रकाशित कविताओं के प्रकाशन के लिए संस्थान को भरपूर सहयोग दिया जाएगा। और मालरोड पर कविवर की प्रतिमा का सौंदर्यकरण किया जाएगा। जिससे देश-विदेश से आने वाले सैलानी उनकी कविताओं से भी रूबरू हो सके। पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला ने कहा कि चंद्रकुंवर बर्त्वाल संभावनाओं के कवि थे। अल्पायु में ही हिंदी जगत को विराट खजाना दे गए। पूर्व पालिकाध्यक्ष मनमोहन सिंह मल्ल ने कहा कि चंद्रकुंवर की कविताओं में करूणा और वेदना सम्माहित है। उन्होंने कहा कि बर्त्वाल पहाड के अद्वितीय कवियों में शुमार थे। लेखक और फिल्मकार प्रदीप भंडारी ने कहा कि चंद्रकुंवर को उत्तराखंड का कालीदास और भवभूति भी माना जाता है। उन्होंने कहा कि संस्थान की और से की गई पहल से स्थानीय स्तर पर उनकी कविताओं को प्रचार-प्रसार और अधिक किए जाने की आवश्यकता है। श्रद्वाजलि सभा में चंद्रकुवर बर्त्वाल शोध संस्थान के सचिव नरेंद्र पडियार, संयोजक उपेंद्र लेखवार, भाजपा मंडल अध्यक्ष मोहन पेटवाल, महिला मोर्चा अध्यक्ष पुष्पा पडियार, व्यापार सघ अध्यक्ष रजत अग्रवाल, नागेंद्र उनियाल, जगजीत कुकरेजा, कुशाल राणा, अरविंद सेमवाल, भगवान सिंह धनाई, भगवती प्रसाद कुकरेती, पूरण जुयाल, बीरेंद्र सिंह कैंतुरा, एमपीजी कालेज के प्राचार्य डा. सुनील पंवार, सभासद पंकज खत्री, विजय रमोला, पूर्व सभासद बीना पंवार, सुनील पंवार, अनीता सक्सेना, प्रमिला पवार नेगी, स्मृति हरि, देवी प्रसाद गोदियाल, अनिल गोदयाल, नमिता कुमाई, राजीव अग्रवाल, आशीष गोयल, प्रभा बर्त्वाल, नीरज अग्रवाल, तनमीत खलासा, बिजेंद्र भंडारी, भावना गोस्वामी, वसीम खान, श्रीपति कंडारी, राधा आनंद, जगमोहन कंडारी, रोहित पाठक समेत अनेक हिमवंत काव्य प्रेमी मौजूद रहे।

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