बदरीनाथ धाम के आलौकिक दर्शन कराएगा नया प्लान, पर्यावरणीय चिंताएं भी मास्टर प्लान से जुड़ी, पढ़ें पूरी खबर
बदरीनाथ धाम के स्वरूप को ज्यादा भव्य और अलौकिक बनाने का काम जारी है. यहां 15 प्रोजेक्ट्स में से करीब 8 पूरे हो चुके हैं.
देहरादून: उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के प्रमुख केंद्रों में शामिल बदरीनाथ धाम को अब और अधिक भव्य, दिव्य और आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है. केदारनाथ धाम की तर्ज पर बदरीनाथ में भी मास्टर प्लान के तहत बड़े स्तर पर निर्माण और सौंदर्यीकरण कार्य किए जा रहे हैं. सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं को बदरीनाथ में पहले से कहीं अधिक सुविधाएं और आध्यात्मिक अनुभव मिलेगा. हालांकि दूसरी ओर पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों की चिंताएं भी बढ़ने लगी हैं. उनका कहना है कि हिमालय की संवेदनशील ऊंचाइयों पर भारी निर्माण कार्य भविष्य में पर्यावरणीय संकट को जन्म दे सकता है.
दरअसल, बदरीनाथ धाम में करीब 15 योजनाओं पर काम किया जा रहा है. इनमें से आठ योजनाएं पूरी हो चुकी हैं. जबकि बाकी प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम जारी है. सरकार इस पूरे मास्टर प्लान के जरिए धाम के आसपास के क्षेत्र को एक धार्मिक-आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है. इस योजना के तहत करीब 350 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से अलग-अलग कार्य किए जा रहे हैं.मास्टर प्लान का मुख्य उद्देश्य बदरीनाथ धाम की धार्मिक और पौराणिक पहचान को बनाए रखते हुए श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार करना है. हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
ऐसे में यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन पार्किंग, आवागमन, बैठने की व्यवस्था, सुरक्षा और आधुनिक सुविधाओं को विकसित करने पर विशेष ध्यान दे रहा है.सरकार की ओर से धाम को अलौकिक स्वरूप देने के लिए बड़े स्तर पर आर्टवर्क भी कराया जा रहा है. इस कार्य पर करीब 10 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है. इन कलाकृतियों में भगवान विष्णु के अवतार, स्थानीय संस्कृति, लोक परंपराओं और धार्मिक उत्सवों को दर्शाया जाएगा ताकि श्रद्धालुओं को बदरीनाथ पहुंचते ही आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव मिल सके.
मास्टर प्लान के तहत अब तक जिन प्रमुख कार्यों को पूरा किया जा चुका है, उनमें आईएसबीटी वॉल, अराइवल प्लाजा और शेष नेत्र क्षेत्र शामिल हैं. इन स्थानों को भगवान विष्णु से जुड़ी थीम पर तैयार किया गया है. दीवारों और भवनों पर धार्मिक आकृतियां, पारंपरिक कला और सांस्कृतिक प्रतीकों का इस्तेमाल किया गया है. आने वाले समय में बाकी क्षेत्रों को भी इसी शैली में विकसित किया जाएगा ताकि पूरा धाम एक समान आध्यात्मिक स्वरूप में दिखाई दे.
अगले दो महीनों में धाम में चल रहे कई महत्वपूर्ण कार्य स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगेंगे. करीब 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित बदरीनाथधाम में मौसम और भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद तेजी से काम किया जा रहा है. सीमित समय और कठिन परिस्थितियों के बीच निर्माण कार्यों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन सरकार इसे प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ा रही है.
-धीराज गर्ब्याल सचिव पर्यटन-
सरकार का फोकस केवल धार्मिक स्वरूप तक सीमित नहीं है बल्कि यहां स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है. इसके तहत स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प और पारंपरिक वस्तुओं को बढ़ावा देने के लिए विशेष स्थान विकसित किए जा रहे हैं. साथ ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाएं और मनोरंजन के साधन भी तैयार किए जा रहे हैं ताकि यात्रा अनुभव बेहतर बनाया जा सके. हालांकि दूसरी तरफ इस पूरी परियोजना को लेकर पर्यावरणविदों की चिंता लगातार बढ़ रही है. हिमालयी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्यों को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठते रहे हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक निर्माण गतिविधियां पहाड़ों की प्राकृतिक संरचना को प्रभावित कर सकती हैं. पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने भी बदरीनाथ मास्टर प्लान को लेकर चिंता जाहिर की है. उनका कहना है कि बदरीनाथ बेहद संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में स्थित है जहां प्रकृति का संतुलन बहुत नाजुक है. ऐसे में भारी निर्माण कार्य पर्यावरण के लिए खतरा बन सकते हैं.उनका कहना है कि सरकार को विकास कार्यों के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए. किसी भी परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले यह सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि उससे पहाड़ों की स्थिरता, जल स्रोतों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी पर नकारात्मक असर न पड़े.
हिमालयी क्षेत्रों में निर्माण कार्यों के दौरान वैज्ञानिक अध्ययन और पर्यावरणीय मूल्यांकन बेहद जरूरी है. यदि विकास और संरक्षण के बीच संतुलन नहीं बनाया गया तो भविष्य में इसका गंभीर प्रभाव देखने को मिल सकता है.फिलहाल सरकार बदरीनाथमास्टर प्लान को उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन की दिशा में एक बड़ा कदम मान रही है. आने वाले समय में यह धाम न केवल आस्था का केंद्र बनेगा बल्कि आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक विशेष आध्यात्मिक पर्यटन स्थल के रूप में भी पहचान बनाएगा. लेकिन इसके साथ यह सवाल भी लगातार बना हुआ है कि क्या विकास की यह रफ्तार हिमालय की संवेदनशील प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर आगे बढ़ पाएगी या नहीं.
