इंडस्ट्री क्षेत्र में माहौल बिगाड़ने की कोशिश की आशंका, अलर्ट मोड में श्रम विभाग, श्रमिकों से की ये अपील
उत्तराखंड इंडस्ट्री क्षेत्र में माहौल बिगाड़ने और श्रमिकों को आंदोलन के लिए भड़काने के संकेत मिल रहे हैं.
देहरादून: उत्तराखंड के औद्योगिक क्षेत्रों में इन दिनों श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी को लेकर हलचल तेज होती दिखाई दे रही है. खास तौर पर देहरादून के सेलाकुई इंडस्ट्रियल एरिया में हाल ही में हुए श्रमिकों के हंगामे के बाद श्रम विभाग भी सतर्क हो गया है. विभाग को आशंका है कि कुछ बाहरी तत्व औद्योगिक माहौल को बिगाड़ने और श्रमिकों को आंदोलन के लिए भड़काने की कोशिश कर रहे हैं. यही वजह है कि अब श्रम विभाग खुद सामने आकर श्रमिकों को जागरूक करने और उन्हें अफवाहों से बचाने का प्रयास कर रहा है.
दरअसल, हाल ही में उत्तराखंड श्रम विभाग ने न्यूनतम मजदूरी की नई दरें जारी की हैं. विभाग का दावा है कि राज्य में तय की गई मजदूरी पड़ोसी राज्यों हिमाचल प्रदेश और बिहार की तुलना में बेहतर और अधिक है. इसके बावजूद कुछ संगठनों और बाहरी लोगों द्वारा श्रमिकों के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है कि राज्य में न्यूनतम मजदूरी 20 हजार रुपये तय होनी चाहिए थी और सरकार तथा विभाग श्रमिकों के हितों की अनदेखी कर रहे हैं. सेलाकुई औद्योगिक क्षेत्र में इसी तरह की चर्चाओं और नाराजगी के बीच कुछ स्थानों पर श्रमिकों ने विरोध प्रदर्शन और हंगामा भी किया.
इसके बाद श्रम विभाग सक्रिय हुआ और अधिकारियों को मौके पर भेजा गया. विभागीय अधिकारियों ने श्रमिकों से बातचीत कर उन्हें वर्तमान मजदूरी दरों और सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी दी. साथ ही यह भी समझाने का प्रयास किया गया कि किसी भी तरह की अफवाह या भड़काऊ बातों में आने से उद्योगों का माहौल खराब हो सकता है, जिसका असर आखिरकार श्रमिकों के रोजगार पर ही पड़ेगा.
मौजूदा स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कुछ बाहरी तत्व श्रमिकों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि श्रमिकों को यह गलत जानकारी दी जा रही है कि सरकार को न्यूनतम मजदूरी 20 हजार रुपये घोषित करनी चाहिए थी, जबकि श्रम विभाग पहले ही नियमों और प्रक्रियाओं के तहत नई मजदूरी दरें तय कर चुका है.
-प्रकाश चंद दुमका, श्रम आयुक्त उत्तराखंड-
श्रम आयुक्त प्रकाश चंद दुमका ने कहा कि उत्तराखंड सरकार लगातार श्रमिकों के हितों के लिए काम कर रही है और इसी दिशा में पहली बार इंजीनियरिंग उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों के लिए अलग से न्यूनतम मजदूरी तय की गई है. यह कदम राज्य के औद्योगिक इतिहास में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे पहले इंजीनियरिंग सेक्टर के लिए अलग श्रेणी की मजदूरी व्यवस्था स्पष्ट रूप से लागू नहीं थी. श्रम विभाग के अनुसार राज्य में गैर-इंजीनियरिंग उद्योगों के श्रमिकों के लिए एक महीने पहले ही वीडीए यानी वैरिएबल डियरनेस अलाउंस लागू करने की घोषणा की गई थी. इसके अलावा न्यूनतम मजदूरी भी औद्योगिक क्षेत्र के लिए लागू है.
इसमें अकुशल श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी 13,018 रुपये, अर्द्धकुशल श्रमिकों के लिए 13,451 रुपये, कुशल श्रमिकों के लिए 13,883 रुपये और अति कुशल श्रमिकों के लिए 14,611 रुपये तय किए गए हैं. वहीं इंजीनियरिंग उद्योगों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए पहली बार अलग न्यूनतम मजदूरी निर्धारित की गई है. इसके तहत अकुशल श्रमिकों के लिए 13,800 रुपये, अर्द्धकुशल श्रमिकों के लिए 15,100 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,900 रुपये मासिक मजदूरी तय की गई है. विभाग का कहना है कि यह मजदूरी दरें कई अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर हैं और इन्हें तय करते समय महंगाई, औद्योगिक परिस्थितियों और श्रमिक हितों का ध्यान रखा गया है. हालांकि श्रमिक संगठनों का एक वर्ग अभी भी मजदूरी बढ़ाने की मांग कर रहा है. उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में वर्तमान मजदूरी पर्याप्त नहीं है.
खासकर देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जैसे औद्योगिक जिलों में रहने और खानपान का खर्च लगातार बढ़ा है, ऐसे में श्रमिकों को बेहतर वेतन मिलना चाहिए. दूसरी ओर उद्योग प्रबंधन और सरकार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि औद्योगिक शांति बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि किसी भी तरह का बड़ा आंदोलन निवेश और रोजगार दोनों को प्रभावित कर सकता है.गौरतलब है कि इससे पहले हरिद्वार के औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसी प्रकार की स्थिति देखने को मिली थी. उस समय भी न्यूनतम मजदूरी और श्रमिक हितों को लेकर आंदोलन की स्थिति बनने लगी थी. लेकिन श्रम विभाग और प्रशासन ने समय रहते हस्तक्षेप करते हुए बातचीत के जरिए मामला शांत कराया था. अधिकारियों का मानना है कि औद्योगिक क्षेत्रों में छोटे विवाद यदि समय पर नहीं सुलझाए जाएं तो वे बड़े आंदोलन का रूप ले सकते हैं.
इस पूरे घटनाक्रम के बीच श्रम विभाग अब लगातार औद्योगिक क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा रहा है. अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे समय-समय पर उद्योगों का निरीक्षण करें और श्रमिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें. विभाग यह भी देख रहा है कि कहीं मजदूरी नियमों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा और श्रमिकों को तय दरों के अनुसार भुगतान मिल रहा है या नहीं.श्रम विभाग की ओर से श्रमिकों से अपील की जा रही है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों या भड़काऊ संदेशों से सावधान रहें और अपनी समस्याओं को सीधे विभाग के सामने रखें. विभाग का कहना है कि सरकार और प्रशासन श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन औद्योगिक शांति बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है.
उत्तराखंड जैसे राज्य में उद्योगों की स्थिरता रोजगार के लिहाज से बेहद अहम है. राज्य में बड़ी संख्या में स्थानीय और बाहरी श्रमिक विभिन्न औद्योगिक इकाइयों में काम करते हैं. ऐसे में यदि औद्योगिक क्षेत्रों का माहौल खराब होता है तो उसका सीधा असर उत्पादन, निवेश और रोजगार पर पड़ सकता है. इसलिए सरकार, उद्योग प्रबंधन और श्रमिक संगठनों के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है. फिलहाल श्रम विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है और प्रशासनिक स्तर पर लगातार संवाद की रणनीति अपनाई जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार का विवाद बड़ा रूप न ले सके और औद्योगिक क्षेत्रों में कामकाज सामान्य रूप से चलता रहे.
