क्रिकेटर ऋषभ पंत पिथौरागढ़ के पाली में बना सकते हैं घर, मां ने रोड के लिए ग्रामीणों से की बात

क्रिकेटर ऋषभ पंत पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट पाली में घर बना सकते हैं. क्योंकि ऋषभ पंत यहां के मूल निवासी हैं.

पिथौरागढ़ (उत्तराखंड): प्रदेश में जमीन खरीदने को लेकर जाने माने क्रिकेटर ऋषभ पंत सोशल मीडिया पर चर्चा में है. इसी बीच उनके पैतृक गांव पाली में पुश्तैनी मकान का नवनिर्माण शुरू होने से गांव में उनके लौटने की उम्मीद जगी है. पलायन से प्रभावित इस गांव में पंत परिवार के दोबारा सक्रिय होने को लोग रिवर्स पलायन की संभावनाओं से भी जोड़कर देख रहे हैं.

गंगोलीहाट विकासखंड मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर पाली गांव ऋषभ पंत का पैतृक गांव है, यहां उनकी पुश्तैनी जमीन और मकान है, जो समय के साथ जीर्ण-शीर्ण हो गया था. अब उनकी मां सरोज पंत ने गांव पहुंचकर पुराने मकान के नवनिर्माण का काम शुरू कराया है. ऋषभ के चचेरे भाई दिनेश चंद्र पंत ने बताया कि उनकी मां कुछ दिन गांव में रहने के बाद लौट गई हैं.

पुश्तैनी आवास का नवनिर्माण शुरू हो चुका है. उन्होंने कहा कि यदि ऋषभ पंत और उनका परिवार गांव लौटता है तो इससे पाली को नई पहचान मिलेगी और रिवर्स पलायन के साथ गांव के विकास को भी गति मिल सकती है. उन्होंने बताया कि गांव तक अब तक सड़क सुविधा नहीं पहुंची है. ऋषभ पंत की मां ने सड़क निर्माण को लेकर ग्रामीणों से भी बातचीत की है. इससे सड़क की उम्मीद जगी है. ऋषभ पंत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर दिल्ली से अपना बेस उत्तराखंड में स्थानांतरित करने और यहां जमीन खरीदकर घर बनाने की इच्छा जताई है.

यह अच्छी बात होगी जब क्रिकेटर अपने पैतृक गांव लौटेंगे. पूरा गांव उनका स्वागत करने के लिए तैयार है.
– विनोद प्रसाद, ग्राम प्रधान, पाली

उन्होंने कहा था कि वह अपने पहाड़ी लोगों के बीच लौटना चाहते हैं और राज्य के विकास में योगदान देना चाहते हैं. पोस्ट में उन्होंने जमीन खरीदने की प्रक्रिया में मदद मांगी थी और स्पष्ट किया था कि वह सरकार से मुफ्त जमीन या किसी तरह का का तोहफा नहीं चाहते, बल्कि सरकारी दरों पर जमीन खरीदना चाहते हैं. ऋषभ पंत की पोस्ट के बाद उनके पैतृक गांव में पुश्तैनी मकान का नवनिर्माण शुरू होने से चर्चाओं को और बल मिला है. हालांकि पंत परिवार की ओर से उनके गांव लौटने को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है.

यदि ऋषभ पंत यहां पर घर बनाना चाहते हैं तो मैं 20 नाली भूमि निशुल्क दूंगा. हम ऋषभ पंत का स्वागत करते हैं.
-नीरज पंत, स्थानीय निवासी

पलायन की मार पाली गांव पर भी पड़ी है. गांव तक पहुंचने के लिए अब भी करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है. क्षेत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी के चलते बड़ी संख्या में ग्रामीण गांव छोड़कर चले गए. यही वजह है कि कभी करीब 300 परिवारों से आबाद रहे पाली में अब केवल 50 परिवार रह गए हैं.

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