राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में 74000 पेज का आरोप पत्र दाखिल, चंपत राय और अनिल मिश्रा बने गवाह

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में आरोप पत्र पांच लोहे के बक्सों में पेश किया गया. इसमें 133 गवाहों की सूची दाखिल.

अयोध्या : श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में विवेचक पुलिस क्षेत्राधिकारी अयोध्या आशुतोष तिवारी ने बुधवार को आठ आरोपियों के खिलाफ लगभग 74000 पन्नों का आरोप पत्र विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम रजत वर्मा की अदालत में दाखिल किया.

आरोप पत्र पांच लोहे के बक्सों में पेश किया गया. इसमें विवेचना के दौरान 101 परचे काटे गए और अभियोजन पक्ष की ओर से 133 गवाहों की सूची दाखिल की गई है. अदालत ने आरोप पत्र पर संज्ञान भी ले लिया.

विवेचना के दौरान पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ आवासीय मकान में घुसकर चोरी तथा मालिक के घर से नौकर द्वारा चोरी से संबंधित धाराएं हटा दी हैं.

वहीं आरोपी सुभाष श्रीवास्तव के खिलाफ चोरी का माल रखने से संबंधित धारा 317(2) बीएनएस भी आरोप पत्र में शामिल नहीं की गई है. अन्य सात आरोपियों के खिलाफ धारा 316(5), 317(2), 317(5), 61(2) बीएनएस तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ए) और 13(2) के तहत आरोप पत्र दाखिल किया गया है.

सुभाष श्रीवास्तव के खिलाफ धारा 316(5), 317(5), 61(2) बीएनएस तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ए) और 13(2) में आरोप पत्र दाखिल हुआ है.

मामले की रिपोर्ट श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने रामजन्मभूमि थाने में दर्ज कराई थी. इसमें अनुकल्प मिश्रा, करुणेश पांडेय, मनीष कुमार यादव, लवकुश मिश्रा, रमाशंकर मिश्रा, अविनाश शुक्ला, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और सुभाष श्रीवास्तव को आरोपी बनाया गया था.

पुलिस ने विवेचना के दौरान आरोपियों को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ की और बरामदगी की. आरोपियों की ओर से दाखिल आपत्तियों पर सुनवाई के बाद अदालत ने सामान्य आशय से संबंधित धारा हटा दी थी.

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में 74000 पेज का आरोप पत्र दाखिल. (ईटीवी भारत)

आरोप पत्र में 133 गवाहों की सूची

आरोप पत्र में बार एसोसिएशन की ओर से दो जुलाई को दिए गए प्रार्थना पत्र और शपथ पत्रों को केस डायरी के परचा संख्या 92 से 95 में शामिल किया गया है. अभियोजन की कहानी को पुष्ट करने के लिए 133 गवाहों में गोपाल राव, डॉ. अनिल मिश्रा, चंपत राय और कृष्ण मोहन के नाम भी शामिल हैं.

आरोप पत्र के अवलोकन को लेकर अधिवक्ताओं का हंगामा

आरोप पत्र दाखिल होने की जानकारी पर बार एसोसिएशन अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्र अन्य अधिवक्ताओं के साथ अदालत पहुंचे. उन्होंने आरोप पत्र का अवलोकन करने की मांग की, लेकिन शुरुआत में अनुमति नहीं मिलने पर अधिवक्ताओं ने विरोध जताया. इसके बाद बार एसोसिएशन की आपात बैठक हुई.

बैठक में तय हुआ कि प्रकरण के लिए गठित अधिवक्ताओं की कमेटी अदालत में जाकर आरोप पत्र का अवलोकन करेगी. कमेटी के सदस्यों ने बाद में आरोप पत्र का अवलोकन किया, जिसके बाद स्थिति शांत हुई.

इसके बाद करीब 3:30 बजे मामले में बहस हुई. वरिष्ठ अधिवक्ता प्रियनाथ सिंह, कृपाल चंद्र खरे और सौरभ मिश्रा ने बहस के दौरान आरोप लगाया कि बरामद रकम कृष्ण मोहन के लॉकर में रखी गई थी.

उनका कहना था कि चार जून को बरामदगी के बाद रकम 26 जून तक लॉकर में रही. अधिवक्ताओं ने एसआईटी द्वारा पूर्व में की गई 81 लाख रुपये की बरामदगी का भी मुद्दा उठाया और कहा कि विवेचना में इस रकम के संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है.

अधिवक्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि जिन लोगों के कब्जे से कथित चोरी की रकम बरामद हुई, उन्हें गवाह बनाया गया है. उन्होंने चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल राव और कृष्ण मोहन की भूमिका से जुड़े बिंदुओं पर अग्रिम विवेचना की मांग अदालत से की. आरोप पत्र दाखिल किए जाने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए एसपी सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा. पुलिस की ओर से आरोप पत्र दाखिल किए जाने के साथ ही विवेचना समाप्त कर दी गई.

Spread the love

सोशल मीडिया वायरल