कोरोना की जंग लड़ने गांव-गांव पंहुच रही हंस फाउंडेशन की मदद – विजेद्रं रावत
अरविन्द थपलियाल
उत्तरकाशी : करोना के खिलाफ गांव गांव तक पहुंच रही है हंस फाउंडेशन की मदद। पुलिस चौकियों, चैक पोस्टों, अस्पतालों व गांव तक पहुंचा रहे हैं आक्सीमीटर, थर्मामीटर, मास्क और सैनिटाइजर उत्तरकाशी जिले के उपेक्षित यमुना घाटी में हंस फाउंडेशन के मदद से जरूरतमंदों तक अच्छी गुणवत्ता वाले मास्क, सैनेटाइजर, आक्सीमीटर तथा थर्मामीटर वितरित किए जा रहे हैं।
यह सामग्री कोरोना वारियर्स जैसे पुलिसकर्मी, वन विभाग व स्थानीय निकायों के चैकपोस्ट, अस्पताल, पत्रकारों व गांव में सक्रिय महिला मंगल दलों व ग्राम प्रधानों में वितरित की जा रही है ताकि इस सामग्री से जरूरतमंदों की मदद हो सके।
घाटी में फाउंडेशन की सामग्री वितरित करने वाली ” हमराही विकास समिति” के सदस्य व वरिष्ठ पत्रकार विजेन्द्र रावत ने बताया कि उन्होंने मसूरी के कुलूखेत चैकपोस्ट, कैमटी थाना, यमुना पुल वन विभाग चैक पोस्ट, पुलिस चौकी- नैनबाग, डामटा, नौगांव व थाना बड़कोट को सामग्री वितरित की गई । इन स्थानों पर लोगों की आवाजाही ज्यादा होती है।
सामूदायिक स्वास्थ्य केंद्र, नौगांव, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, बड़कोट, राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय बड़कोट व विवेकानंद धर्मार्थ चिकित्सालय बड़कोट में आक्सीमीटर व थर्मामीटर चिकित्सकों व स्वास्थ्य कर्मियों को भेंट किए गये।
जिला दिव्यांग समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र कुमार भुप्पी के माध्यम से यह सामग्री दिव्यांगों तक पहुंचाई जा रही है।
श्री रावत ने बताया कि नगर पंचायत नौगांव के अध्यक्ष शशिमोहन राणा उनके पार्षदों, नगरपालिका अध्यक्ष बड़कोट श्रीमती अनुपमा रावत को भी आक्सीमीटर, सैनिटाइजर, थर्मामीटर व मास्क सौंपे गये।
कई गांवों में महिला मंगल दलों व युवाओं में भी यह सामग्री दी गई जिनके माध्यम से यह जरूरतमंदों तक पहुंच रही है।
नौगांव व बड़कोट के पत्रकारों को उनके कार्यकाल के लिए सामग्री दी गई ताकि वे कोरोना से अपना बचाव कर सकें और गांव के वैद्यों को भी जोड़ा जा रहा आधुनिक तकनीक से,
हमराही कल्याण समिति के विजेन्द्र रावत ने बताया कि वे हंस फाउंडेशन की मदद से गांव में उन वैद्यों को भी यह उपकरण दे रहे हैं जो अपने परम्परागत ज्ञान से स्थानीय जड़ी बूटियों व घरेलू नुस्खों से कई बीमारियों का कारगर इलाज करते हैं। इन वैद्यों को आक्सीमीटर व थर्मामीटर मुहैया कराये जा रहे हैं ताकि उनके परम्परागत व आधुनिक ज्ञान का समन्वय छोटी मोटी बीमारियों से लोगों को बचा सकें।
ऐसे वैद्यों ने फाउंडेशन की इस मदद की तारीफ की है।
