विधानसभा चुनाव में विकास के मुद्दे गायब, नशे में डूबता अपना पहाड़।
अरविन्द थपलियाल
उत्तरकाशी : उत्तराखंड में विधानसभा का चुनाव का बिगुल बज चुका है और 14फरवरी को यहां मतदान होना है और निर्वाचन आयोग अपनी तैयारीयों पर जुटा हुआ है।
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की बात करें तो जनपद उत्तरकाशी के तीनों विधानसभा क्षेत्रों में इस बार जमीनी मुद्दे गायब हैं। बतादें कि जनपद उत्तरकाशी विकास की दृष्टी से काफी पिछडा़ जिला है। जनपद के अंदर स्वस्थ सुविधाओं कि स्थिति बदहाल है अस्पताल रेपर सेटंर बने हैं लेकिन नेताओं के ऐजेंडा सिर्फ शराब और कवाब है। उत्तरकाशी जनपद की बात करें तो यहां पुरोला विधानसभा, यमुनोत्री, और गंगोत्री है, तीनो विधानसभाओं में ग्रामीण सड़कों की स्थिति दयनिय है यहांतक की दर्जनों गांव में अभी सड़क, पानी, बिजली, नेटवर्क, शिक्षा व्वस्था की स्थिति बहुत खराब है लेकिन यह सब बातें नेताओं और राजनैतिक दलों के चुनावी ऐजेडे़ में नहीं है। हां इतना जरूर है कि राजनैतिक दल और नेता शराब खूब परोस रहे हैं ऐसा कोई नेता नहीं है जो शराब ना पीला रहा हो। इतना जरूर है कि कुछ छोटे नेता ऐसे हैं जो कम संशाधनों में चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन बडे़ चेहरों ने शराब को अपना चुनावी ऐजेंडा बना रखा है। नेताओं को लगता है कि वह शराब पिलाकर ही चुनाव जीत सकतें हैं। आपके जानकारी के लिये बतादें कि सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक दिन में यह सभी नेता लगभग एक करोड़ से अधिक की शराब पिला रहे हैं जनपद में। शराब के सेवन करने वाले सबसे अधिक युवा हैं जो चिंता का विषय है। अब सवाल यह है कि क्या निर्वाचन आयोग किसी दवाब में काम कर रहा है या अनजान है। पुलिस थानों के सामने शराबीहुड़ददंग करते देखे गये लेकिन पुलिस प्रशासन मौन देखा गया। क्या निर्वाचन आयोग ने चुनाव लड़ रहे प्रत्याशीयों के ठिकानों पर कभी छापेमारी की?यह स्थिति सबसे अधिक उन नेताओं की है जो अपने को जीताऊ और बाहुबली कहतें हैं। यह संख्या ज्यादातर आधा दर्जन से अधिक के नेताओं की है जो निर्वाचन के मानकों की धज्या उडा़ रहे हैं। अब हर मतदाता के जहन में यह सवाल है कि करोडो़ रूपये की बर्वादी करने वाले नेताओं से क्या विकास की उम्मीद लगाई जा सकती है अहम सवाल है?
