पशुपालकों के लिये शोपीस बनी यह एंबुलेसं, दवाईयों का टोटा।

रिपोर्ट – अरविन्द थपलियाल

उत्तरकाशी : जनपद के नौगांव विकासखंड के अंतर्गत मंगलवार को मोबाइल पशु चिकित्सा एंबुलेंस लोदन और ओड़गांव के पशुपालकों के पशुओं के इलाज के लिए पहुंची, इलाज के दौरान एंबुलेंस कर्मचारियों के पास दवाई ना होने पर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई, पशुपालक अनूप नौटियाल ने कहा कि सरकार जिस तरह से पशुपालकों के हित के लिए पशुपालकों के द्वार पर मोबाइल पशु चिकित्सा एंबुलेंस भेज रहे हैं यह पशुपालकों की आय दोगुनी करने के लिए एक वरदान साबित होगा अगर एंबुलेंस के साथ-साथ उसमें दवाई भी उपलब्ध करवाई जाए, साथ ही आरोप लगाया कि पशु चिकित्सा एंबुलेंस सेवा का संचालन करने वाली कंपनी जीवीके इएमआरआई 1962 के द्वारा एंबुलेंस में दवाइयां उपलब्ध नहीं करवाई जाती है जिससे पशु चिकित्सकों की टीम तो पशुपालक के द्वार पर पहुंच जाती है लेकिन दवाई के अभाव में इलाज नहीं कर पाती है । वहीं इस दौरान पशुपालक अंकित बहुगुणा ने भी पशु एंबुलेंस को अपने बीमार भैंस के लिए बुलाया था लेकिन दवाई ना होने के अभाव में भैंस का इलाज भी नहीं हो पाया, इस दौरान अन्य ग्रामीणों ने भी नाराजगी व्यक्त करी है पशु एंबुलेंस में दवाई ना होने पर।

प्रदेश में पशुओं के इलाज के लिए वर्तमान में 323 पशु चिकित्सालय संचालित हैं। इसके अलावा 770 पशु सेवा केंद्र, 682 कृत्रिम गर्भाधान केंद्र, चार पशु प्रजनन फार्म है। कर्नाटक और मेघालय के बाद इस योजना को शुरू करने वाला उत्तराखंड देश का तीसरा राज्य बना है।

सूरज शर्मा प्रबंधक जीवीके ईएमआरआई ( 1962) देहरादून ने कहा कि मेडिसिन सप्लाई करने के लिए हमारे पास देहरादून में इस समय सेंटर है यहां से प्रतिदिन सभी जनपदों में दवाई भिजवाई नहीं जा सकती है, हमारी कोशिश रहती है कि हमारी टीम पशुपालकों के द्वार पर जाकर पशुओं की बीमारी को चेक करें उसके बाद जो दवाई उपलब्ध है वह देखकर अन्य दवाई के लिए नजदीकी सरकारी हॉस्पिटल के लिए लिख देते है, हमारी कोशिश है कि जल्द हि दवाई का नया स्टॉक उत्तरकाशी जनपद के लिए भेजा जाएगा, आने वाले समय में दवाई की कमी नहीं होने दी जाएगी।

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