धर्म और संस्कृति का रक्षा करना मानव का पहला धर्म – शिवप्रसाद।
रिपोर्ट – अरविन्द थपलियाल
उत्तरकाशी/पुरोला : रवांई घाटी के अंतर्गत पुरोला नगर पंचायत में अष्टोत्तरशत (108)श्रीमद् भागवत महापुराण 31मई से चल रहा है जो 6जुन को विराम लेगा।
श्रीमद् भागवत कथा महापुराण में 108 कथा वाचक हैं जो मुल पाठ के साथ कथा का भी रसपान करवा रहे हैं,अष्टोत्तरशत महापुराण में मुख्य व्यास की भूमिक आचार्य शिवप्रसाद नौटियाल शास्त्री करवा रहे हैं।
आचार्य शिवप्रसाद नौटियाल इसी वर्सष ककमल संसकृत विद्यालय से सेवा निवृत हुयें हैं और आज उसी विद्यालय में एक कुशल संरक्षक की भूमिका निभा रहे हैं,आज आचार्य शिवप्रसाद नौटियाल के लगाये सेकडो़ पौधे व्यास पीठ सहित अनेक सरकारी सेवा में हैं।
वेद व्यास शिव प्रसाद नौटियाल का सपना रवांई घाटी में अष्टोत्तशरत 108 भागवत महापुराण करने का था जिसकी शुरूआत वर्ष 2022से प्रारभं नगर पंचायत पुरौला के अध्यक्ष हरिमोहन नेगी के सहयोग से दो दर्जन देव डोलियों के साथ हुई।
अष्टोत्तरशत 108 श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन दुसरे वर्ष हो रहा है और जिसमें 25 देव डोलियां और 108व्यास व दो दर्जन ब्रह्मण हैं ।कथा में आचार्य प्रकाश बहुगुणा और संचालक चंद्रशेखर नौटियाल है।
रवांई घाटी में 108 श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन भव्य और दिव्य हो रहा है जिसमें प्रतिदिन हजारों की तादात में भागवत प्रेमी पंहुच रहे हैं जो देवी देवताओं के दर्शन सहित आचार्य ब्रह्मणों का आशर्वाद ले रहे हैं।
अष्टोत्तरशत 108 श्रीमद् भागवत कथा में आज छठे दिन मुख्य व्यास आचार्य शिवप्रसाद नौटियाल ने क्षेत्र के सुख शान्ति और समृद्वी की कामना की और सनातन धर्म के प्रति लगाव और विश्वास कायम करने की बात कही,व्यास पीठ से श्री नौटियाल ने बताया कि हमें अपनी सस्कृति और धर्म की रक्षा को पहली प्राथमिकता देनी होगी यही मानव धर्म है।
