महावीर माही ने ईमानदारी की मिशाल की कायम, यात्री का लौटाया किमती सामान।

अरविन्द थपलियाल

उत्तरकाशी : देवभूमि उत्तराखंड में ईमानदारी अभी भी कायम है, यहां के सीधे साधे लोग व हृदयस्पर्शी व्यवहार के कायल पूरे देश के लोग हैं।कुछ विरले मामलों को छोड़कर इस देवभूमि में अभी भी लोग अपनी ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं।देवभूमि का मान बढ़ाने वालों में एक नाम औऱ जुड़ गया है ए नाम है महावीर पंवार उर्फ माही जो ग्राम-वाडिया, पट्टी गीठ, थाना बड़कोट जनपद उत्तरकाशी के निवासी हैं, सरकारी सेवा या अन्य रोजगार न होने के कारण महावीर पंवार “माही”छह माह के लिए यमुनोत्री धाम में पूजा सामग्री की सीजनल दुकान लगा कर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं।कल इनकी यमुनोत्री स्थित दुकान पर राजकोट गुजरात के श्रद्धालुओं राजेन्द्र भाई व गिरीश भाई अपने दो मोबाईल फोन व अन्य कीमती सामान सहित दो बैग भूल गए थे।माही ने दोनों बैगों को दुकान में ही सम्भाल कर रख दिया, जब दिन में बैग में रखा श्रद्धालु का फोन की घण्टी बजने लगी तो माही ने ईमानदारी का परिचय देते हुए फोन रिसीव कर श्रद्धालुओं को उक्त बैग सामान सहित अपनी यमुनोत्री स्थिति दुकान में होने की जानकारी दी, अपना सामान सहित बैग सुरक्षित होने की सूचना मिलने पर दोनों श्रद्धालु प्रफुलित हो उठे।यह दोनों श्रद्धालु बैग खोया समझकर यमुनोत्री धाम से मिलों दूर वापस लौट चुके थे।लेकिन जब उन्हें बैग सुरक्षित होने की सूचना मिली तो खुश हो गए।माही ने अपना साथी स्टाफ मनोज चौहान भेजकर बैग वापस कुथनौर श्रद्धालुओं तक पहुंचाए।उन्होंने महावीर पंवार का उनकी ईमानदारी की प्रसंसा करते हुए दिल की गहराइयों से धन्यवाद किया।श्रद्धालुओं ने माही को पुरस्कृत करने की बात भी कही लेकिन माही ने बिना किसी लालच के दोनों श्रद्धालुओं के बैग सामान सहित वापस लौटा दिए।

घटना का सार महावीर पंवार उर्फ माही के शब्दों में-

जय श्री यमुने, कल दिन में मेरी दुकान में किसी का यह बैग गलती से छूट गया था और दो दिनों से नेटवर्क न होने के कारण बैग वाले यात्री का पता नहीं चल पा रहा था और जैसे ही नेटवर्क आया तो यात्री का उस बैग में रखा फोन बजने लगा तो हमने यात्री की लोकेशन पूछी तो वह कुथनौर में रुके थे तो उनके सामान जो कि दो मोबाईल फोन और कुछ कपड़े थे जो अपने स्टाफ को भेजकर यात्रियों का बैग सकुशल पहुंचाने के लिए भेजा है जिनकी कीमत लगभग 35 से 50 हजार रुपये तक हो सकती है। यात्रियों के ख़ुशी का ठिकाना दिल से महसूस किया तो मन को आनंदित महसूस कर रहा हूँ। उन्होंने फोन पर हमको इनाम देने की बात की है लेकिन हमने बोला यमुनोत्री धाम में ऐसा कुछ नहीं है वह नेटवर्क आ गया जिससे फोन की घंटी बजकर बातचीत हो गयी।

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